विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित महोत्सव का समापन रविवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ. समापन समारोह में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत की जीवंत झलक देखने को मिली. आदिवासी फैशन शो, पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
फैशन शो में दिखी आदिवासी संस्कृति की विविधता
समारोह के दौरान आयोजित आदिवासी फैशन शो विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. पारंपरिक परिधानों और आभूषणों से सजे प्रतिभागियों ने मंच पर आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध परंपराओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया. फैशन शो के माध्यम से जनजातीय समुदाय की पहचान, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिली.
लोकनृत्य और गीतों से बंधा समां
महोत्सव में कलाकारों और छात्र-छात्राओं ने विभिन्न पारंपरिक आदिवासी नृत्यों और लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी. मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर प्रस्तुत नृत्य ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया. दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया.
अधिकारी भी रहे मौजूद
समापन समारोह में उपायुक्त अजय नाथ झा, उनकी पत्नी डॉ. प्रतिमा झा, पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा, डीडीसी शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आइएएस अरविंद राधाकृष्णन सहित जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
अधिकारियों ने कार्यक्रम का अवलोकन कर कलाकारों और प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया. महोत्सव के समापन के साथ आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसकी विरासत पहुंचाने का संदेश भी दिया गया.
