पेटरवार वन प्रक्षेत्र अंतर्गत पिछरी के जंगल में पेड़ों की अवैध कटाई थमने का नाम नहीं ले रही है. जंगल में लगातार बड़े पेड़ों को निशाना बनाये जाने से वन सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. शनिवार को जंगल में सागवान के दो विशाल पेड़ कटे हुए मिले. दोनों पेड़ों की लंबाई करीब 20 फुट और गोलाई लगभग तीन फुट बतायी गयी है.
केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष सह पिछरी समिति के अध्यक्ष सूरज महतो ने बताया कि शनिवार सुबह जंगल में कटे हुए सागवान के पेड़ों पर ग्रामीणों की नजर पड़ी. उन्होंने स्थल पर जाकर जायजा लिया.
डीएफओ को दी गई जानकारी
इसकी सूचना डीएफओ संदीप कुमार शिंदे को दे दी गयी है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी इस जंगल में पेड़ों की अवैध कटाई का मामला कई बार सामने आया था और इसकी जानकारी वन विभाग को दी गयी थी.
सूरज महतो ने विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर वन सुरक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिख रही है. उनका आरोप है कि सूचना के बावजूद विभागीय कर्मी कई बार समय पर घटनास्थल नहीं पहुंचते. इसी का फायदा उठाकर लकड़ी के अवैध कारोबारी बार-बार जंगल को निशाना बना रहे हैं.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में पिछरी जंगल में सागवान समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गये थे. अब ये पौधे विशाल पेड़ों का रूप ले चुके हैं और लकड़ी तस्करों की नजर इन्हीं पेड़ों पर है.
केंद्रीय समिति के अध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने भी घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि जंगल में बार-बार हो रही अवैध कटाई को गंभीरता से लेने की जरूरत है. उन्होंने विभाग से पिछरी समेत आसपास के जंगलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था और व्यापक रणनीति तैयार करने की मांग की.
