स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 का स्वागत किया है. कंपनी ने इसे खनिज क्षेत्र में एक अनुमानित वित्तीय व्यवस्था और दीर्घकालिक नीतिगत निश्चितता स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है. यह संशोधन खनिज कराधान और शुल्कों में अधिक स्पष्टता और एकरूपता लाता है. इसके अलावा, यह पहले से प्रभावी व लंबित कर मामलों का समाधान करता है, जिससे खनन उद्योग में और अधिक भरोसा व निश्चितता आएगी.
नए निवेश और खदानों के विकास में होगी आसानी
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के पास लौह अयस्क और कोयले की बड़ी कैप्टिव खदानें हैं. इस सुधार से कंपनी के खनन कार्यों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, नए निवेश और खदानों के विकास में आसानी होगी और दीर्घकालिक कच्चे माल की सुरक्षा मजबूत होगी. एक स्थिर कर व्यवस्था से कंपनी अपने खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगी और लौह अयस्क के खनन को बढ़ाने में मदद होगी.
घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी
इस सुधार से घरेलू बाजार में लौह अयस्क की उपलब्धता बढ़ेगी. खदानों के बेहतर विकास के बाद सेल लागू नियमों के तहत अतिरिक्त लौह अयस्क को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध करा सकेगी. इससे घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारतीय इस्पात (स्टील) उद्योग को स्थानीय लौह अयस्क आसानी से मिल सकेगा. इस कदम से क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ने, आयात पर निर्भरता कम होने, खनिज व ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने और खनिज आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.
कच्चे माल की सुरक्षा बढ़ेगी
सेल आत्मनिर्भर व विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए अपने खनिज संसाधनों के जिम्मेदार और टिकाऊ विकास, कच्चे माल की सुरक्षा और घरेलू बाजार में अधिक लौह अयस्क उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
