गैंगस्टर प्रिंस खान के सहयोगी सेक्टर दो निवासी राकेश कुमार को गिरफ्तार करने के बाद बोकारो पुलिस कई सवालों के जवाब तलाश कर रही है. उसके पास से जब्त मोबाइल के डाटा की जांच टेक्निकल सेल ने शुरू कर दी है. पता चला है कि राकेश विलासितापूर्ण जीवन के चक्कर में अपराध की दुनिया से जुड़ गया. उसने स्नातक तक की पढ़ाई बोकारो से की है. पिता सेवानिवृत्त इस्पातकर्मी हैं और सेक्टर दो में परिवार रहता है. राकेश मूल रूप से बिहार के सिवान का रहने वाला है. बियाडा के एक नामी कंपनी में राकेश को आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिये सुपरवाइजर की नौकरी मिली थी. नौकरी के दौरान उसकी पहचान कई आपराधिक गैंग से जुड़े युवकों से हुई. इसमें से एक ने राकेश को अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनाने का सपना दिखाया. प्रिंस खान से संपर्क करने के लिए इंटरनेशनल सीम उपलब्ध कराया. व्हाट्सएप कॉल के जरिये एक बार प्रिंस खान से बात करने के बाद अपराध की दुनियां में प्रवेश करने का आत्मविश्वास बढ़ गया. राकेश ने एक गैंग बनाया, जो बोकारो में कई आपराधिक गैंग के लिए रंगबाजी मांगने का काम करता था.
राकेश के गैंग में ये थे शामिल
राकेश के गैंग में बोकारो व चास के प्रिंस कुमार गुप्ता, श्याम कुमार सिंह, अजय सिंह, ओम प्रकाश पॉल, जयनेंद्र शुक्ला, गोलू कुमार, भूपेंद्र सिंह शामिल थे. ये सभी किसी न किसी तरह से बियाडा की फैक्ट्री से जुड़े थे. कोई चालक का काम करता था, तो कोई सुपरवाइजर व मजदूर का काम करता था. इसी गैंग ने बियाडा की बीएमडब्ल्यू कंपनी से प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने की योजना बनायी थी. व्हाट्सएप कॉल के जरिये प्रिंस खान को समय-समय पर राकेश आपराधिक गतिविधियों की जानकारी देता रहा. प्रिंस खान से निर्देश पर ही वह आगे की गतिविधियों को अंजाम देने में जुटा था. राकेश के गैंग के सात सदस्यों को बालीडीह पुलिस ने दो अप्रैल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बाद राकेश अंडरग्राउंड हो गया था.
