बोकारो से रंजीत कुमार की रिपोर्ट
Bokaro News: पिंडराजोरा थाना क्षेत्र के चर्चित पुष्पा महतो हत्याकांड में थाना के सस्पेंड 28 पुलिस अधिकारी व जवान में 25 को निलंबन मुक्त कर दिया गया है. इसके बाद भी सभी पर विभागीय जांच जारी रखी गयी है. जबकि पिंड्राजोरा के तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक रंजन, मुंशी अक्षय कुमार व केस के जांच अधिकारी अनिकेत कुमार फिलहाल सस्पेंड है. पुलिस कस्टडी में मुख्य आरोपी दिनेश का इकबालिया बयान वीडियोग्राफी के जरिये दर्ज कर लिया गया है. हत्याकांड के मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो के बयान के बाद तीनों की मुश्किलें बढ़ेगी. मामले को लेकर पुलिस विभाग में चर्चा जोरों पर है.
घूसखोर थाना प्रभारी अब भी सस्पेंड
हत्याकांड के अनुसंधान में लापरवाही बरतने के मामले में तत्कालीन एसपी हरविंदर सिंह ने 11 अप्रैल की मध्य रात्रि को ही पिंड्राजोरा थाने के 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया था. मामले में बोकारो के पूर्व सिटी डीएसपी आलोक रंजन को जांच का जिम्मा सौंपा गया था. श्री रंजन के जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सभी 25 पुलिस अधिकारी व जवान को निलंबन मुक्त किया गया. जांच रिपोर्ट में मिला कि अनुसंधान में लापरवाही व घूसकांड में बाकी पुलिसकर्मियों की कोई संलिप्तता नहीं थी. मुख्य रूप से थाना प्रभारी अभिषेक रंजन, तत्कालीन मुंशी अक्षय कुमार व आईओ अनिकेत कुमार साजिश में शामिल थे. तीनों के खिलाफ विभागीय जांच तेज हो गई है.
तीनों ने शराब व घूस लेकर एसपी को किया था गुमराह
डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर बोकारो के तत्कालीन एसपी हरविंदर सिंह ने मामले के आरोपी दिनेश महतो से गहन पूछताछ की थी. खुलासा हुआ कि थाना प्रभारी अभिषेक रंजन मुख्य आरोपी दिनेश से कथित तौर पर नकद व शराब के रूप में मोटी घूस की रकम लेकर जांच को लगातार भटका रहा था. अपने ही एसपी को गुमराह कर रहा था. घोर संवेदनहीनता व लापरवाही को देख कर तत्कालीन एसपी श्री सिंह ने पूरे थाने को ही सस्पेंड कर दिया था, जबकि सस्पेंड सिर्फ थाना प्रभारी, मुंशी व केस के आईओ को करना था. पूर्व सिटी डीएसपी श्री रंजन के रिपोर्ट के बाद अब 25 कर्मियों को राहत मिल गई है.
21 जुलाई 2025 को कॉलेज के लिए घर से निकली थी पुष्पा
पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खुंटाडीह गांव के एक गरीब मजदूर परिवार की बेटी पुष्पा महतो 21 जुलाई 2025 को कॉलेज में फॉर्म जमा करने के लिए घर से निकली थी. इसके बाद वापस घर नहीं लौटी. बेटी के लापता होने पर बेबस मां रेखा देवी पिंड्राजोरा थाना पहुंचीं, तो थाना प्रभारी व मुंशी की मिलीभगत के कारण पुलिस का दिल नहीं पसीजा. शिकायत लेने से साफ मना कर दिया गया. इसके बाद परिजनों को दौड़ाया जाता रहा. एसपी के निर्देश पर थाना प्रभारी ने महज एक सनहा दर्ज कर खानापूर्ति की थी. घटना के करीब 10 दिन बाद चार अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज हुई. पुलिस महीनों तक जांच के नाम पर माता-पिता को प्रताड़ित करती रही. दिसंबर 2025 में पुष्पा के पुणे में होने की सूचना पर पुलिस ने सक्रियता दिखायी. एक टीम मृतका के पिता को साथ लेकर पुणे गयी. वहां लाचार पिता को अकेले स्टेशन पर छोड़कर पुलिसकर्मी निकल गये. लापता पुष्पा के पिता का फोन भी चोरी हो गया. वह भीख मांगकर किसी तरह वापस घर लौटे.
हाईकोर्ट के फटकार के बाद जांच हुई थी शुरू
स्थानीय पुलिस के अमानवीय रवैये से टूटे पीड़ित परिवार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से झारखंड हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की. फरवरी 2026 में याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पुलिस को कड़ी फटकार लगायी. कोर्ट के तीखे तेवरों के बाद डीजीपी के निर्देश पर आनन-फानन में डीआईजी संध्या रानी मेहता के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया. एसआईटी ने जब पुष्पा के प्रेमी दिनेश कुमार महतो को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो रोंगटे खड़े कर देने वाला सच सामने आया.
आरोपी ने कबूली थी पुष्प की हत्या की बात
पूछताछ में आरोपी दिनेश ने कबूल किया था कि पुष्पा के साथ पिछले तीन साल से प्रेम संबंध में था. पुष्पा लगातार शादी का दबाव बना रही थी. पीछा छुड़ाने के लिए साजिश रच कर 21 जुलाई 2025 को पुष्पा को चास कॉलेज के पास बुलाया. फुसलाकर पास के एक सुनसान जंगल में ले गया. चाकू से रेतकर पुष्पा की निर्मम हत्या कर दी. शव को झाड़ियों में छिपा दिया. आरोपी की निशानदेही पर घटना के करीब आठ-नौ माह बाद पुष्पा का क्षत-विक्षत कंकाल व हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद किया गया. पीड़ित मां व न्याय के लिए तड़प रहे परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद बंधी है.
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