बोकारो से रंजीत कुमार की रिपोर्ट
Bokaro News: गैंगस्टर प्रिंस खान के नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बोकारो पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. प्रिंस खान के करीबी सहयोगी राकेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है. राकेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है, वहीं अब उसके आपराधिक नेटवर्क और संपर्कों की गहन जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच टेक्निकल सेल कर रही है. शुरुआती जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि राकेश लंबे समय से प्रिंस खान और उसके गैंग के अन्य सदस्यों के संपर्क में था.
सुपरवाइजर की नौकरी से अपराध की दुनिया तक
जांच में सामने आया है कि राकेश कुमार बोकारो के बियाडा क्षेत्र स्थित एक नामी कंपनी में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था. उसने बोकारो से ही स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की थी. उसके पिता एक सेवानिवृत्त इस्पातकर्मी हैं और परिवार सेक्टर-2 स्थित आवास में रहता है. परिवार मूल रूप से बिहार के सिवान जिले का निवासी है. नौकरी के दौरान राकेश की पहचान कुछ ऐसे युवकों से हुई जो विभिन्न आपराधिक गिरोहों से जुड़े हुए थे. इन्हीं संपर्कों ने उसे अपराध की दुनिया की ओर आकर्षित किया. बताया जाता है कि उसे आलीशान जिंदगी और अपराध जगत में पहचान बनाने के सपने दिखाए गए.
इंटरनेशनल सिम से जुड़ा प्रिंस खान से संपर्क
पुलिस जांच के अनुसार राकेश को प्रिंस खान से संपर्क स्थापित करने के लिए एक इंटरनेशनल सिम उपलब्ध कराया गया था. इसके बाद उसने व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से प्रिंस खान से बातचीत शुरू की. एक बार सीधे संपर्क स्थापित होने के बाद राकेश का आत्मविश्वास बढ़ गया और उसने खुद को स्थानीय स्तर पर गैंग संचालक के रूप में स्थापित करने की कोशिश शुरू कर दी. इसके बाद उसने अपने आसपास युवकों का एक समूह तैयार किया, जो विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने लगा.
बोकारो और चास के युवकों को बनायी गैंग
राकेश ने बोकारो और चास क्षेत्र के कई युवकों को अपने साथ जोड़ा. इनमें प्रिंस कुमार गुप्ता, श्याम कुमार सिंह, अजय सिंह, ओम प्रकाश पॉल, जयनेंद्र शुक्ला, गोलू कुमार और भूपेंद्र सिंह शामिल थे. इनमें से अधिकांश युवक किसी न किसी रूप में बियाडा क्षेत्र की फैक्ट्रियों से जुड़े हुए थे. कोई चालक का काम करता था तो कोई सुपरवाइजर या मजदूर के रूप में कार्यरत था. पुलिस का कहना है कि राकेश ने इन युवकों को संगठित कर रंगदारी वसूली के लिए एक स्थानीय नेटवर्क तैयार किया था.
बीएमडब्ल्यू कंपनी से मांगी गई थी रंगदारी
जांच में यह भी सामने आया है कि बियाडा की बीएमडब्ल्यू कंपनी से रंगदारी मांगने की पूरी योजना राकेश कुमार ने तैयार की थी. पुलिस के अनुसार स्थानीय स्तर पर प्रिंस खान गैंग का नेतृत्व वही कर रहा था. राकेश ने अपने हाथों से रंगदारी मांगने वाली परची लिखी और उसे कंपनी परिसर के पास फेंकवाया. इसके बाद इस घटना का वीडियो तैयार किया गया. बाद में प्रिंस खान की ओर से वीडियो के जरिए रंगदारी की मांग की पुष्टि भी की गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया.
व्हाट्सएप कॉल पर चलता था पूरा नेटवर्क
पुलिस को मिले तकनीकी साक्ष्यों के अनुसार राकेश लगातार व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से प्रिंस खान को गतिविधियों की जानकारी देता था. उसे समय-समय पर निर्देश भी मिलते थे और उन्हीं निर्देशों के आधार पर आगे की गतिविधियां संचालित की जाती थीं. राकेश अपने गैंग के सदस्यों के माध्यम से विभिन्न काम करवाता था और पूरे नेटवर्क का संचालन करता था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए और किन-किन घटनाओं को अंजाम दिया गया.
पहले गिरफ्तार हुए थे सात सदस्य
बीएमडब्ल्यू कंपनी से रंगदारी मांगने के मामले में बालीडीह पुलिस ने 2 अप्रैल को कार्रवाई करते हुए गैंग के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. गिरफ्तार आरोपियों में प्रिंस कुमार गुप्ता, श्याम कुमार सिंह, अजय सिंह, ओम प्रकाश पॉल, जयनेंद्र शुक्ला, गोलू कुमार और भूपेंद्र सिंह शामिल थे. इन गिरफ्तारियों के बाद राकेश कुमार फरार हो गया था और अंडरग्राउंड होकर छिपा हुआ था. पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी.
टेक्निकल सेल और एसआईटी की निगरानी से गिरफ्तारी
रंगदारी मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख इंस्पेक्टर नवीन कुमार सिंह और टेक्निकल सेल लगातार राकेश की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे. तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस को उसकी लोकेशन की जानकारी मिली. इसके बाद 1 जून की देर रात जब राकेश बोकारो में प्रवेश कर रहा था, तभी डुमरी क्षेत्र में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अब उससे पूछताछ कर गैंग के अन्य संपर्कों और आपराधिक गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है.
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अभी और गिरफ्तारी की संभावना
पुलिस सूत्रों के अनुसार राकेश की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है. मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है. पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं. फिलहाल बोकारो पुलिस की छापेमारी जारी है और गैंग से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने तक अभियान जारी रहेगा.
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