प्रिंस खान समेत कई भगोड़ों पर शिकंजा! जानिए प्रत्यर्पण के बाद किन मामलों में चलेगा मुकदमा

केंद्र सरकार ने प्रत्यर्पित भगोड़ों पर मुकदमे के नए निर्देश जारी किए हैं. अब सिर्फ उन्हीं अपराधों में कार्रवाई होगी जिनकी प्रत्यर्पण अनुमति मिली थी. झारखंड के वांछित अपराधियों पर भी इसका असर होगा.

बोकारो. झारखंड के कई वांछित अपराधियों पर पुलिस-प्रशासन का शिकंजा कसने की तैयारी के बीच विदेश से प्रत्यर्पित कर भारत लाये जाने वाले भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों को महत्वपूर्ण निर्देश दिये हैं. केंद्र के निर्देश के मुताबिक विदेश से प्रत्यर्पण के जरिये भारत लाये गये किसी आरोपी पर उन्हीं अपराधों में अभियोजन चलाया जा सकता है, जिनके संबंध में प्रत्यर्पण की अनुमति मिली है. ऐसे व्यक्ति के खिलाफ दूसरे पुराने या नये मामलों में सीधे कार्रवाई करने से पहले संबंधित कानूनी और प्रत्यर्पण शर्तों का पालन जरूरी होगा.

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झारखंड के संदर्भ में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को एक रिपोर्ट भेजे जाने की बात सामने आयी है. इसके आधार पर राज्य के गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक को केंद्र के निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है.

कई मोस्ट वांटेड अपराधियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस

राज्य पुलिस प्रशासन की ओर से प्रिंस खान, राहुल दुबे, राहुल सिंह, गोपी सिंह, शेख उसतार, नीरज सिंह और तेजेन्द्र पाल सिंह समेत कई वांछित अपराधियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किये जाने की जानकारी दी गयी है. इनमें प्रिंस खान समेत कुछ अपराधियों के खिलाफ बोकारो, धनबाद और आसपास के जिलों के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या के प्रयास और धमकी समेत कई आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही गयी है.

हालांकि, विदेश से प्रत्यर्पण के बाद ऐसे अपराधियों पर भारत में दर्ज अन्य मामलों में कार्रवाई का रास्ता संबंधित प्रत्यर्पण आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही तय होगा.

प्रत्यर्पण की शर्तों का पालन जरूरी

केंद्र के संज्ञान में यह मामला आया कि अलग-अलग राज्यों में विदेशों से प्रत्यर्पित कर भारत लाये गये भगोड़े अपराधियों के खिलाफ उन्हें सौंपे जाने के बाद दूसरे मामलों में भी अभियोजन शुरू किया जा रहा है. केंद्र ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जतायी है.

भारत के प्रत्यर्पण कानून में भी इस संबंध में विशेष प्रावधान है. Extradition Act, 1962 की धारा 21 का शीर्षक ही यह निर्धारित करता है कि किसी विदेशी राज्य द्वारा सौंपे या लौटाये गये आरोपी या दोषी को कुछ अन्य अपराधों के लिए बिना निर्धारित प्रक्रिया के मुकदमे का सामना नहीं कराया जा सकता.

गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया संबंधित प्रत्यर्पण कानून के साथ-साथ संबंधित देश के साथ लागू संधि, समझौते या व्यवस्था के तहत संचालित होती है.

पुलिस मुख्यालय को अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश

केंद्र की ओर से उठाये गये इस मुद्दे के बाद झारखंड गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से प्रत्यर्पित किसी व्यक्ति के खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई संबंधित प्रत्यर्पण की शर्तों और लागू कानून के अनुरूप ही हो.

ऐसे में विदेश में रहकर झारखंड में आपराधिक मामलों में वांछित आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में लुकआउट नोटिस और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के साथ-साथ भारत लाये जाने के बाद उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में अभियोजन की कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी.

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By Ranjeet kumar

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