पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर लेंगे वन संरक्षण का संकल्प, 2 सितंबर को होगा आयोजन

कसमार प्रखंड के हिसीम पहाड़ पर 2 सितंबर को एक अनूठी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा, जहाँ पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर वन संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा. वन विभाग के अधिकारी और ग्रामीण मिलकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे. यह आयोजन वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है.

कसमार प्रखंड के हिसीम पहाड़ स्थित महादेव बेड़ा के समीप दो सितंबर को पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर वन संरक्षण का संकल्प लिया जायेगा. केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति की ओर से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम पहले 30 अगस्त को प्रस्तावित था, लेकिन वन विभाग के वरीय अधिकारियों की सहमति के बाद इसकी तिथि बदलकर दो सितंबर कर दी गयी है. आयोजन में ग्रामीणों, वनप्रेमियों और समिति के पदाधिकारियों के साथ वन विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे.

डीएफओ समेत वन विभाग के अधिकारी रहेंगे मौजूद

समिति के केंद्रीय अध्यक्ष विष्णुचरण महतो ने बताया कि बोकारो के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) नीतीश कुमार और आइएफएस संदीप कुमार शिंदे ने दो सितंबर को कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी है. अधिकारियों की मौजूदगी को देखते हुए समिति की ओर से आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गयी हैं. कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों और वनप्रेमियों की भी भागीदारी होगी.

पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने की पुरानी परंपरा

हिसीम पहाड़ में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा कई दशकों पुरानी है. ग्रामीण और वनप्रेमी पेड़ों को अपना संरक्षक मानते हुए उन्हें रक्षा सूत्र बांधते हैं और जंगलों की रक्षा का संकल्प लेते हैं. आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति और जंगलों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम है.

आने वाली पीढ़ियों को जंगलों से जोड़ने की पहल

विष्णुचरण महतो ने कहा कि पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने का उद्देश्य समाज में वन संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाना है. जंगलों की रक्षा के लिए लोगों की भागीदारी जरूरी है. ऐसी परंपराओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भी जंगलों के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जाता है.

सामाजिक आंदोलन को मिल रही मजबूती

समिति के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि हिसीम पहाड़ क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा वन संरक्षण के सामाजिक आंदोलन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. जंगलों पर बढ़ते दबाव के बीच स्थानीय लोगों की भागीदारी से ही वन संरक्षण को स्थायी रूप दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति और जंगलों के महत्व से जोड़ने के लिए इस परंपरा को आगे भी जारी रखा जायेगा.


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लेखक के बारे में

By दीपक सवाल

मैं दीपक सवाल, 1994 से प्रभात खबर से जुड़ा हूं। वर्ष 2011 से 2015 तक बोकारो कार्यालय में स्टॉफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत रह चुका हूं। 2015 से कसमार डेटलाइन से कार्यरत हूं। मेरा संपर्क नंबर : 9431145607

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