Bokaro News : सात दशक से भी अधिक पुराने हैं बेरमो के कई चर्च

Bokaro News : बेरमो अनुमंडल में कई चर्च सात दशक से भी ज्यादा पुराने हैं.

बेरमो अनुमंडल में कई चर्च सात दशक से भी ज्यादा पुराने हैं. जारंगडीह में संत अंथोनी चर्च की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी. पहले एक छोटे से कमरे में चर्च था. वर्ष 1983 में यहां से थोड़ी दूर ढोरी माता तीर्थालय बन कर तैयार हुआ. ढोरी माता तीर्थालय के प्रथम पुजारी फादर अल्बर्ट भरभराकरन थे. उस वक्त ढोरी माता तीर्थालय बोकारो थर्मल पारिस के अंतर्गत आता था, जारंगडीह संत अंथोनी चर्च का अपना पारिस नहीं था. ढोरी माता तीर्थालय में ढोरी माता की प्रतिमा है, जो पहले संत अंथोनी चर्च में थी.

करगली स्थित कार्मल स्कूल तथा जवाहरनगर स्थित संत मारिया विद्यालय में भी चर्च है. संडे बाजार स्थित बाइबल रीडिंग रूम का इतिहास दशकों पुराना है. यह स्थान बोकारो कोलियरी के अलावा गोमिया, कथारा, जारंगडीह, सुभाष नगर, ढोरी आदि क्षेत्रों के मसीही समाज के लिए आस्था का केंद्र है. बाइबल रीडिंग रूम की स्थापना 1989 में तत्कालीन बोकारो कोलियरी के पीओ बालास्वामी अकला एवं तत्कालीन कार्मिक प्रबंधक कच्छप ने करायी थी. पहले यह बाइबल रीडिंग रूम बेरमो स्टेशन के समीप था. वर्तमान में रीडिंग रूम के उपसचिव हेमंत ने बताया कि जब कोलियरी का विस्तार होने लगा तो सीसीएल प्रबंधन ने मसीही समाज की आस्था को देखते हुए संडे बाजार में भाई जॉन के आवास के समीप स्थानांतरित कर इसका निर्माण कराया. उस वक्त इसके अध्यक्ष जयनाथ सहाय, सचिन सैमुअल हंसदा, बीबी जॉन, एम कानन शबन वारला, हेरेन भेगरा, नारायण, एलेक्जेंडर, जॉर्ज, सुकुमारन, अब्राहम हेंब्रम, सीएस नायर जेवंत हेंब्रम, पी नैयर, पीडी हेंब्रम आदि ने सक्रिय भूमिका निभायी थी. वर्तमान में फादर प्रतिभा हांसदा, पादरी लुकश भुईया फादर की भूमिका निभाते हैं. वर्तमान में सचिव रॉबिन सैमुअल, अध्यक्ष धीरज जॉन सागा सहित कई लोग रीडिंग रूम का संचालन कर रहे हैं.चंद्रपुरा स्थित मेथोडिस्ट चर्च व संत जोसेफ कैथोलिक चर्च में 56 वर्षों से प्रार्थना होती आ रही है. 60 के दशक में प्लांट बनने के क्रम में आये ईसाई समुदाय के लोगों ने प्राइवेट क्षेत्र में चर्च बनाया था. प्लांट के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक वीजे राव की महत्वपूर्ण भूमिका थी. चर्च बनने के कारण ही इस रोड का नाम चर्च रोड के नाम से जाना जा रहा है. चंद्रपुरा में इस समुदाय के लगभग 300 परिवार हैं. मथोडिस्ट चर्च के नये पादरी मोजेश प्रसाद हैं.

ललपनिया के तिलैया स्थित एजी चर्च (एजी मिशन ऑफ मर्सी चैपल) का निर्माण 2006 में शुरू हुआ था और 2008 में बन कर तैयार हुआ. इस चर्च के रेवरेन उदय प्रताप सोय हैं. गोमिया के ससबेड़ा स्थित संत योसेफ चर्च की स्थापना 1967 में की गयी थी. इसके आसपास लोयोला उच्च विद्यालय, लोयोला मध्य विद्यालय एवं लोयोला इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं. इस चर्च के पदाधिकारी फादर सीरियल जोसेफ हैं. इसके अलावा फादर सुरेंद्र, फादर प्रदीप, फादर अल्बर्ट, फादर नोरबट, सिस्टर शांता, सिस्टर सेरिन, सिस्टर सुजीता आदि चर्च के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं.बोकारो थर्मल में कैथोलिक चर्च की स्थापना कार्मेल स्कूल की स्थापना के समय ही 1955 में की गयी थी. इसकी स्थापना रोमन कैथोलिक समुदाय के ईसाइयों एवं स्कूल के सिस्टर आदि के लिए की गयी थी. स्थानीय कार्मेल स्कूल परिसर का चर्च हजारीबाग के रोमन कैथोलिक बिशप के धार्मिक अधिकार क्षेत्र में आता है. चर्च के प्रथम फादर ऑस्ट्रेलिया के फादर भरभराकन थे. बाद में फादर फोस्टर, फादर जिम टूवेस्ट, कैमिल कुजूर, डेमियन, जार्ज चिटारी, फादर प्रदीप टोप्पो, बिनय कुजूर, नार्बेट लकड़ा और वर्तमान में पल्ली पुरोहित माइकल लकड़ा एवं सहायक पल्ली पुरोहित बिनोद लकड़ा चर्च के फादर हुए. कार्मेल स्कूल की प्राचार्या सिस्टर एम मलर एवं हिंदी कार्मेल की एचएम सिस्टर जॉयस कुल्लू का कहना है कि स्कूल परिसर में दो चर्च स्थापित है. रविवार को मिस्सा में ज्यादा भीड़ होने पर हिंदी कार्मेल में चर्च का आयोजन किया जाता है.

क्रिसमस को लेकर सजाये गये गिरिजाघर

क्रिसमस को लेकर जारंगडीह स्थित ढोरी माता तीर्थालय के अलावा जारंगडीह बारह नंबर, संडे बाजार व अन्य गिरिजाघरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. ढोरी माता तीर्थालय में आकर्षक चरनी बनायी गयी है. यहां बुधवार देर रात काफी संख्या में लोग पहुंचेंगे तथा माता मरियम के समक्ष मत्था टेकेंगे. बुधवार की देर रात यहां प्रभु ईसा मसीह के जन्म के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. ढोरी माता तीर्थालय के फादर माइकल लकड़ा ने कहा कि प्रभु यीशु मसीह ने पृथ्वी पर आकर लोगों को प्रेम के साथ जीने की बात कही.

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