बोकारो. मिथिला सांस्कृतिक परिषद की ओर से रविवार शाम सेक्टर-4 ई स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के विद्यापति सभागार में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित मैथिली साहित्यकार डॉ. ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म की स्मृति जयंती समारोह सह मैथिली कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा समेत परिषद के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर और मणिपद्म की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया.
मैथिली साहित्य में मणिपद्म के योगदान को किया याद
परिषद के महासचिव नीरज चौधरी ने स्वागत भाषण में मैथिली साहित्य में मणिपद्म के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि परिषद वर्ष 1990 से लगातार मणिपद्म जयंती के अवसर पर साहित्यिक आयोजन करता आ रहा है. वक्ताओं ने मणिपद्म की साहित्यिक रचनाओं और उनके सामाजिक सरोकारों पर चर्चा करते हुए उनके योगदान को याद किया.
बुद्धिनाथ झा को मिला मिथिला गौरव सम्मान
समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा को मिथिला गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया. डॉ. रणजीत कुमार झा ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैथिली महाकाव्य ‘ऊं महाभारत’ के रचयिता बुद्धिनाथ झा साहित्य की विभिन्न विधाओं में सक्रिय रहे हैं. रंगकर्म और मंच संचालन के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनायी है.
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‘हसरतों के बीच’ का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान कवयित्री कल्पना झा की काव्य पुस्तक ‘हसरतों के बीच’ का विमोचन किया गया. साहित्यलोक के संयोजक अमन कुमार झा ने पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डाला.
मुख्य वक्ता बुद्धिनाथ झा ने मणिपद्म को बहुआयामी प्रतिभा के साहित्यकार के रूप में याद किया. उन्होंने कहा कि लोकगाथाओं पर आधारित मणिपद्म के कई उपन्यास चर्चित रहे और उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार प्रमुखता से उभरता है. बताया गया कि वर्ष 1973 में उन्हें उपन्यास ‘नैका बनिजारा’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला था.
कवि सम्मेलन में दिखी मैथिली की विविधता
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में बुद्धिनाथ झा की अध्यक्षता में मैथिली कवि सम्मेलन हुआ. कल्पना झा, धनंजय कुमार दास, डॉ. रणजीत कुमार झा, गंगेश कुमार पाठक, अरुण पाठक, पूनम चौधरी, भुटकुन झा, सुनील मोहन ठाकुर, विजय शंकर मल्लिक और बुद्धिनाथ झा समेत अन्य कवियों ने विभिन्न रस की कविताएं और गीत प्रस्तुत किये.
कवियों की रचनाओं में प्रेम, मानवीय संवेदना, सामाजिक सद्भाव और मिथिला की सांस्कृतिक स्मृतियां प्रमुखता से उभरीं. रचनाओं की प्रस्तुति पर श्रोताओं ने भी उत्साह दिखाया.
मंच संचालन सुनील मोहन ठाकुर ने किया, जबकि परिषद के उपाध्यक्ष श्रवण कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम में परिषद के पदाधिकारी, साहित्यकार और बड़ी संख्या में मैथिली प्रेमी उपस्थित रहे.
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