Bokaro News : खंडहर में तब्दील हो गया कथारा सीपीपी

Bokaro News : कथारा स्थित सीपीपी (कैप्टिव पावर प्लांट) खंडहर में तब्दील हो गया है.

कभी अपनी उत्पादित बिजली से पूरे कथारा एरिया को रौशन करने वाला सीपीपी (कैप्टिव पावर प्लांट) खंडहर में तब्दील हो गया है. इस प्लांट की दो यूनिटों से 20 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था. प्लांट परिसर में प्रशासनिक भवन व जीएम कार्यालय भी था. 300 से ज्यादा मजदूरों के अलावा दर्जनों मैकेनिकल इंजीनियर व अधिकारी कार्यरत थे. सीसीएल के कथारा एरिया में करोड़ों रुपये की लागत से बने इस प्लांट के बंद होने के बाद लोहा तस्करों की इस पर नजर पड़ी. कीमती उपकरण सहित लोहा के पार्ट्स-पुर्जे निकाल कर चाेर ले गये. इसमें बेरमो से बाहर के भी कई तस्कर शामिल थे. अब सिर्फ प्लांट का खोखला ढांचा ही रह गया है. प्लांट में लगे बॉयलर, टरबाइन, कोल हैंडलिंग प्लांट, इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट, सब स्टेशन, 10 केवीए के चार ट्रांसफार्मर, आठ केवीए के तीन ट्रांसफार्मर, केबुल के अलावा लोहे के कई सामान खत्म हो गये. कंपनी के 12 डंपर, टीन ट्रैक्टर, दो पोकलेन, दो पेलोडर, एक कार तथा एक एंबुलेंस थे. इन के भी पार्ट्स-पुर्जें गायब हो गये.

बीएचइएल कंपनी ने करीब 125 करोड़ रुपये से इस प्लांट का निर्माण कर वर्ष 1995 में सीसीएल प्रबंधन को इसे सौंप दिया था. सीसीएल की देखरेख में लगभग दस वर्षों तक किसी तरह प्लांट चला. इसके बाद 14 अक्टूबर 2005 में 20 वर्षों के लिए दिल्ली की कंपनी इम्पेरियल फास्टनर्स पावर लिमिटेड (पावर डिवीजन) का ओएंडएम कांट्रेक्ट हुआ और प्लांट कंपनी चलाने लगी. कंपनी ने प्रतिमाह 32 लाख रुपया सीसीएल को भुगतान किया. अचानक मार्च 2018 में जीएसटी राशि का अतिरिक्त भार बढ़ जाने और कोयला की दरों में वृद्धि का कारण बताते हुए उक्त कंपनी ने इस प्लांट को बंद कर दिया. इससे तीन सौ मजदूरों के अलावा 50 अधिकारी, इंजीनियर, मैकेनिकल, ऑफिस में कार्यरत कर्मचारी काम से बैठ गये. इन्हें तीन-चार माह के वेतन का भुगतान भी कंपनी ने नहीं किया. बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर मजदूरों ने लेबर कमिश्नर के अलावा कई नेताओं के पास गुहार लगायी. एरिया स्तर पर दर्जनों बार आंदोलन किया. कुछ लोगों ने पीएमओ तक पत्राचार किया. 21 मार्च 2020 को कंपनी के डायरेक्टर संजीव सागर एवं राजीव सागर ने सीसीएल के डीटी को पत्र लिखा था. इसमें सीपीपी के साथ कंपनी के ओएंडएम कांट्रेक्ट को सरेंडर करने की बात कही थी. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट बंद होने के बाद कंपनी के मालिक के पुत्र एक बार आये थे. मजदूरों के साथ वार्ता कर कहा था कि कंपनी की स्थिति ठीक नहीं है. धीरे-धीरे कर बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जायेगा. प्लांट चलाने में मदद करें. लेकिन फिर कंपनी का कोई अधिकारी प्लांट को देखने नहीं आया.

डीवीसी को बिजली देता था सीपीपी

सीपीपी से उत्पादित बिजली बगल के ही डीवीसी के बीटीपीएस को दिया जाता था. चुकि: कंपनी का कांट्रेक्ट सीसीएल से था, इसलिए कथारा एरिया डीवीसी से जो बिजली लेता था, उसमें इस राशि को घटा दिया जाता था. सूत्रों के अनुसार उक्त कंपनी पावर प्लांट को चलाने के लिए प्रतिमाह करीब एक करोड़ रुपये का रिजेक्ट कोयला सीसीएल से लेती थी. जबकि प्लांट के हर माह का बजट 1.5 करोड़ रुपये था. पहले उत्पादित बिजली को कंपनी ने 3.50 रुपये प्रति यूनिट तथा बाद में चार रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा. जब प्लांट रनिंग स्टेज में था तो यहां से उत्सर्जित छाई भी सीसीएल की बंद खदानों में डंप की जाती थी, जिसके एवज में भी कंपनी को सीसीएल हर माह भुगतान करती थी.

सीसीएल को नहीं किया गया प्लांट हैंड ओवर

सीसीएल प्रबंधन के अनुसार, वर्ष 2018 में अचानक इम्पेरियल फास्टनर्स पावर लिमिटेड कंपनी प्लांट को बंद कर चली गयी. आज तक कंपनी ने सीसीएल को प्लांट हैंड ओवर नहीं किया. सीसीएल ने न्यायालय में कंपनी पर रिजेक्ट कोल का करोड़ों रुपया बकाया रखने संबंधी दावा ठोका है. कंपनी द्वारा प्लांट को हैंड ओवर नहीं किये जाने के कारण सीसीएल ने इस प्लांट की देखरेख से अपने आपको अलग कर लिया.

पिछले वर्ष मेकॉन लिमिटेड व सीसीएल मुख्यालय की टीम ने किया था निरीक्षण

मेकॉन लिमिटेड व सीसीएल मुख्यालय रांची की टीम ने वर्ष 2024 में सीपीपी का निरीक्षण किया था. प्लांट के मेन गेट का ताला खोलवा कर सभी सेक्शन व ऊपरी तल्ले का मुआयना किया गया. वीडियोग्राफी करायी. सीसीएल मुख्यालय से आये इएण्डएम विभाग के सीनियर मैनेजर अरुण पंजियार का कहना था कि सीपीपी को चलाने के लिए इम्पेरियल कंपनी को लीज पर दिया गया था. उक्त कंपनी द्वारा प्लांट नहीं चलाने पर सीसीएल ने इसे टर्मिनेट कर दिया है. न्यायालय में कंपनी और सीसीएल के बीच मामला चल रहा है. मेकॉन लिमिटेड रिपोर्ट न्यायालय को देगी. इसके बाद आगे का फैसला लिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Janak singh choudhary

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >