Bokaro News : अब नहीं तो कब जिला बनेगा बेरमो ?

Bokaro News : 53 साल गुजर गये, अब नहीं तो कब बेरमो को जिला का दर्जा प्राप्त होगा.

बेरमो अनुमंडल का सृजन छह दिसंबर 1972 को किया गया था. बेरमो अनुमंडल का मुख्यालय 1975 में गिरिडीह से स्थानांतरित होकर तेनुघाट आया. गिरिडीह हजारीबाग जिला से अलग होकर बना था. गिरिडीह जिला में गिरिडीह सदर व बेरमो अनुमंडल बनाया गया. सवाल उठता है 53 साल गुजर गये, अब नहीं तो कब बेरमो को जिला का दर्जा प्राप्त होगा. बेरमो को जिला बनाने की मांग आंदोलन, आश्वासन और अनिश्चितता के भंवरजाल में फंस कर रह गयी है. झारखंड में कई ऐसे जिले अलग राज्य गठन के बाद बनाये गये हैं, जो अर्हता के मामले में बेरमो से पीछे थे. 12 दिसंबर 2007 को खूंटी को जिला बनाया गया, जिसकी आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 5,30299 थी. प्रखंड व अंचल की संख्या छह थी. 10 अप्रैल 1974 को कोडरमा को जिला बनाया गया, जिसकी आबादी 7,17,969 और प्रखंड व अंचल छह थे. जामताड़ा को 26 अप्रैल 2001 को जिला बनाया गया, जिसकी आबादी 7,90,207 तथा प्रखंड व अंचल छह थे. चतरा को 29 मार्च 1991 को जिला बनाया गया, जिसकी जनसंख्या 10, 42, 304 थी तथा प्रखंड व अंचल की संख्या सात थी. रामगढ़ को 12 सितंबर 2007 को जिला बनाया गया, जिसकी जनसंख्या 9,49, 169 थी तथा प्रखंड व अंचल की संख्या 06 थी. सिमडेगा को 30 अप्रैल 2001 को जिला बनाया गया, जिसकी जनसंख्या 7,25,653 थी तथा प्रखंड व अंचल की संख्या छह थी. लातेहार को 04 अप्रैल 2001 को जिला बनाया गया, जिसकी जनसंख्या 4,61,738 और प्रखंड व अंचल की संख्या 07 थी. जबकि वर्ष 1971 की जनगणना के अनुसार बेरमो की आबादी 11,07,672 थी. फिलहाल इसकी आबादी 16 लाख के करीब है.

झारखंड राज्य का सबसे समृद्ध व खनिज संपदा से परिपूर्ण बेरमो अनुमंडल को जिला बनाने की मांग दशकों से की जा रही है. लोस व विस चुनाव के समय पार्टी, प्रत्याशी व नेता इस मांग को पूरा करने का वादा करते रहे हैं. चुनावी घोषणा पत्रों में भी इसे जगह देते रहे हैं. लेकिन चुनाव के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.

जिला बनने से लोगों को होती सुविधा

गोमिया के झूमरा से लेकर सेवाती घाटी तथा हिसिम-केदला तक की दूरी वर्तमान बोकारो जिला मुख्यालय से काफी दूर है. बेरमो अनुमंडल में 14 थाना, चार ओपी तथा सात प्रखंड पेटरवार, कसमार, बेरमो, नावाडीह, चंद्रपुरा, जरीडीह गोमिया हैं. बेरमो अनुमंडल का उत्तरी व पश्चिमी भाग जिला मुख्यालय से काफी दूर है. बेरमो को जिला बनने से इन लोगों को काफी सुविधाएं मिलती.

खनिज संपदा से परिपूर्ण है बेरमो

बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल व चंद्रपुरा में डीवीसी तथा ललपनिया में राज्य सरकार का थर्मल पावर स्टेशन है. इसके अतिरिक्त एक कैप्टिव पावर प्लांट है, जो फिलहाल बंद है. बेरमो में कोयला का अकूत भंडार है. सीसीएल का कथारा, बोकारो करगली और ढोरी एरिया में कोयला उत्पादन हो रहा है. कथारा, स्वांग एवं दुगदा में कोल वाशरी है. गोमिया में सबसे पुराना विस्फोटक कारखाना आइएएल ओरिका है. इसके अलावा एसआरयू भंडारीदह में है. बेरमो अनुमंडल के तेनुघाट में सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित एशिया का सबसे बड़ा अर्थ डैम है. बेरमो में कई पर्यटन स्थल हैं, जिसमें ललपनिया का लुगू पहाड़, कसमार का मृगी खोह, ढोरी माता मंदिर, हथिया पत्थर उल्लेखनीय हैं.

लगातार संघर्षरत है बेरमो जिला बनाओ संघर्ष समिति

बेरमो अनुमंडल को जिला बनाने की मांग को लेकर बेरमो जिला बनाओ संघर्ष समिति पांच फरवरी 2022 से 29 फरवरी 2024 तक लगातार संघर्षरत रही और अभी भी संघर्ष कर रही है. समिति द्वारा अभी पंचायत, प्रखंड व अनुमंडल स्तर पर धरना व पंचायतों में जन-जागरण अभियान, अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट से विस तक पदयात्रा जैसे कार्यक्रम किये गये तथा सीएम, राज्यपाल, कमीश्नर, डीसी को ज्ञापन दिया गया. 51 दिनों तक पूरे अनुमंडल क्षेत्र में समिति ने प्रवास कार्यक्रम चलाया. छह दिसंबर 2023 से लगातार 80 दिनों तक अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना दिया गया. समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर सारे तथ्यों से अवगत कराया. पूर्व सीएम चंपई सोरेन से भी मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया था, जिस पर उन्होंने बहुत जल्द बेरमो को जिला बनाने की घोषणा करने की बात कही थी. समिति के संयोजक संतोष प्रजापति, महासचिव वकील महतो, अध्यक्ष कामेश्वर मिश्रा के अलावा कुलदीप प्रजापति व मिथुन चद्रवंशी का कहना है कि इससे अच्छा मौका नहीं आ सकता. जल्द बेरमो को जिला घोषित किया जाना चाहिए.

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