किसी व्यक्ति को किसी भी उम्र में किसी भी चीज से एलर्जी हो सकती है. जीवन शैली में कुछ हेल्दी बदलाव कर एलर्जी से बचा जा सकता है. घर में रहने वाली धूल व मिट्टी एलर्जी का मुख्य कारण होती है. ये कण फर वाले खिलौनों व बिस्तर पर भी मिलते हैं. यह कहना है चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ सफी नेयाज का. वह मंगलवार को अनुमंडल अस्पताल चास में बतौर मुख्य अतिथि एलर्जी से बचाव पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे.
बच्चों को एलर्जी से ज्यादा खतरा
इससे पूर्व गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ नेयाज, उपाधीक्षक डॉ आभा इंदु तिर्की व डॉ रवि शेखर ने संयुक्त रूप से किया. डॉ नेयाज ने अपने संबोधन के क्रम में कहा कि एलर्जी का अटैक आने पर पीड़ित को काफी समस्या का सामना करना पड सकता है.
कभी-कभी घर, कॉलेज या ऑफिस में एलर्जी के कारण सहज काम करना भी मुश्किल हो जाता है. बच्चों को एलर्जी जल्दी अपनी चपेट में ले लेती है. घरों में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं, जिनका ध्यान रख बच्चे को एलर्जी से बचाया जा सकता है.
बच्चों का स्किन होता है नाजुक
डॉ नेयाज ने कहा बच्चे के लिए जितने भी प्रकार के प्रसाधन साबुन, क्रीम व पाउडर इस्तेमाल किये जाते हैं, उनमें किसी प्रकार के रसायन न हों यह ध्यान रखना चाहिए. बच्चे की स्कीन बहुत सेंसेटिव होती है. उसे एलर्जी भी बहुत जल्दी होती है.
बच्चे की हाइजीन व सफाई का ध्यान बहुत ज्यादा रखने से भी बच्चे अति संवेदनशील होकर एलजिर्क हो जाते हैं. धूल-मिट्टी में पलने वाला बच्चा ज्यादा स्वस्थ रहता है, क्योंकि बचपन से मिट्टी के संपर्क में आने वाले बैक्टीरिया से पहचान होती है. उसका इम्यून सिस्टम मजबूत हो जाता है.
घर में प्रोपर वेंटिलेशन है जरूरी
घर में मौजूद पालतू जानवरों से संभव दूरी बना कर रखें. तब जबकि आपको उनके बालों से एलर्जी है. प्घर को साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ जरूरी कीटनाशकों का भी इस्तेमाल करना चाहिए. घर में वूलन का कारपेट इस्तेमाल नहीं करें. घर में प्रोपर वेंटिलेशन रखें. मौके पर डॉ विद्या रानी, नीरज कुमार, जुसपिन केरकेट्टा, कनहैया, बबली कुमारी, अभिषेक कुमार सहित अस्पताल के चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे.
