छत से टपकता पानी, दीवारों में दरार और सीलन; बोकारो में GRP जवानों को प्लास्टिक-तिरपाल का सहारा

बोकारो रेलवे स्टेशन पर जीआरपी जवानों के आवास की हालत बेहद खराब है. 30 साल से जर्जर छत और सीलन के बीच रहने को मजबूर हैं जवान, रेलवे प्रशासन बेखबर.

बोकारो. रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले जीआरपी जवान खुद बदहाल आवास में रहने को मजबूर हैं. बोकारो रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर जीआरपी जवानों के लिए बने पुराने आवास की स्थिति लंबे समय से खराब है.

करीब 30 वर्षों से आवास की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है. जर्जर छत, सीलन भरी दीवारें और सीमित जगह के बीच जवानों को रहने और सामान रखने की परेशानी झेलनी पड़ रही है.

बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है. करकट की छत कई जगह से क्षतिग्रस्त है, जिससे पानी कमरे के अंदर तक पहुंच जाता है. पानी रोकने के लिए छत और किनारों पर प्लास्टिक व तिरपाल का सहारा लिया गया है. जवानों का कहना है कि बारिश के दौरान उन्हें अपने स्तर से ही पानी रोकने का इंतजाम करना पड़ता है.

बारिश से बचाव के लिए करकट और प्लास्टिक के सहारे तैयार किया गया जीआरपी आवास

छत से टपकता है पानी, फर्श हो जाता है गीला

आवास की स्थिति देखकर इसकी जर्जरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. कई जगह करकट की चादर पुरानी और क्षतिग्रस्त नजर आती है. छत से पानी टपकने के कारण कमरे और बरामदे का फर्श गीला हो जाता है. बारिश से बचाव के लिए लगाए गये प्लास्टिक और तिरपाल भी आवास की बदहाली की तस्वीर सामने रखते हैं.

दीवारों पर सीलन, प्लास्टर उखड़ा

आवास की दीवारों पर जगह-जगह नमी और सीलन के निशान हैं. कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़ चुका है. बाहरी दीवार के एक हिस्से में लंबी दरार भी दिखाई देती है. परिसर में बड़े पेड़ों की जड़ें, जमा कचरा और जलजमाव भी समस्या को बढ़ाते हैं.

जीआरपी आवास के आसपास जमा हुआ पानी

एक ही कमरे में रहने और सामान रखने की मजबूरी

आवास के अंदर भी जवानों को पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है. सीमित जगह में कई बेड लगाए गये हैं. कपड़े और जरूरी सामान रखने के लिए अलग से पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. कमरे में कपड़े सुखाने के लिए रस्सियां लगी हैं और घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं भी रखी हुई हैं.

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ऐसे में जवानों को एक ही जगह पर सोने, रहने और अपना सामान रखने की व्यवस्था करनी पड़ रही है. चौबीसों घंटे ड्यूटी करने वाले जवानों के लिए यह स्थिति सुविधाजनक नहीं है.

जंग खा चुका है प्रवेश द्वार

जीआरपी आवास का लोहे का मुख्य गेट भी लंबे समय से रखरखाव के अभाव में जंग खा चुका है. गेट पर लगा पुराना रंग उखड़ गया है और उस पर लिखे शब्द भी काफी हद तक मिट चुके हैं. बारिश के मौसम में परिसर में जगह-जगह पानी जमा हो जाता है.

जवानों की सुविधा और सुरक्षा पर सवाल

स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा में तैनात जीआरपी जवानों के लिए सुरक्षित और बेहतर आवास की सुविधा जरूरी है. ऐसे में जर्जर छत, सीलन भरी दीवारें और खराब गेट के बीच जवानों के रहने की व्यवस्था रेलवे की सुविधाओं पर सवाल खड़े करती है.

जवानों के अनुसार, रेलवे प्रशासन को कई बार आवास की समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है. उनका कहना है कि केवल मरम्मत के बजाय पुराने भवन का पुनर्निर्माण या बेहतर आवास की व्यवस्था की जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है.

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By Dharmanath kumar

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