चास प्रखंड के रघुनातडीह स्थित योगीडीह में पूर्व मंत्री स्व समरेश सिंह के नाम पर बना दादा हाट 18 वर्षों से बंद है. कभी यह हाट आसपास के कई गांवों के किसानों के लिए व्यापार का प्रमुख केंद्र था. वर्ष 2004 में 53 सदस्यों की कमेटी बना कर इस हाट की शुरुआत की गयी थी. शुरुआती दौर में यहां नियमित रूप से किसानों द्वारा सब्जियों की बिक्री की जाती थी. यहां अच्छी भीड़ रहती थी. हाट के बंद होने के बाद वर्ष 2011 में जिला प्रशासन की ओर से यहां लगभग 20 लाख रुपये की लागत से 13 शेड का निर्माण कराया गया. इसके बाद कुछ समय तक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को हाट लगता रहा. बाद में प्रशासनिक उदासीनता और रखरखाव की कमी के कारण हाट की स्थिति बिगड़ती चली गयी और अब यह वीरान है. वर्तमान में शेड जर्जर हो चुके हैं. सफाई, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने स्थिति को और खराब कर दिया है.
ग्रामीणों का कहना है कि हाट बंद होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पिंड्राजोरा, कुरा, जोधाडीह मोड़, चेक पोस्ट चास सहित दूर-दराज के बाजारों में जाना पड़ता है. इससे उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा किराये में ही खर्च हो जाता है और समय की भी बर्बादी होती है.हटिया समिति के सदस्य नारायण उपाध्याय, वसंत गोप, जोहार महतो, जगन गोप, लालजी गोप, सुजीत गोप, मनोज गोप, रमन बाउरी, निरंजन रजवार और शंकर राय सहित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय विधायक से दादा हाट को पुनः चालू कराने की मांग की है. यदि हाट फिर से नियमित रूप से लगने लगे तो योगीडीह, बुधुडीह, दीवानगंज, कुरा, संथालडीह, कुरमा, मधुटांड़, भोंडरो और डुगरीटांड़ सहित कई गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा.
2007 के बाद नहीं हुई थी नीलामी की प्रक्रिया
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2007 में अंचल कार्यालय की ओर से इस हाट की नीलामी की गयी थी. उस समय 1050 रुपये में हाट चलाने की जिम्मेदारी विजय गोप को दी गयी थी. लगभग एक वर्ष तक हाट चलने के बाद इसे बंद कर दिया गया. इसके बाद प्रशासन की ओर से इसकी दोबारा नीलामी की प्रक्रिया
