Bokaro: न OTP आया न ही लिंक दबाया, फिर भी 1.92 लाख गंवाया, अब लगाने पड़ रहे थाने के चक्कर

Bokaro: बोकारो में एक व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो गया. हैरानी की बात यह है कि न तो उसके मोबाइल पर कोई OTP आया और न ही उसने किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, इसके बावजूद उसके खाते से 1.92 लाख रुपये की निकासी हो गई. पूरी खबर नीचे पढ़ें...

बोकारो से रंजीत कुमार की रिपोर्ट
Bokaro: तेनुघाट (ओपी) पेटरवार थाना क्षेत्र के चटनियाबागी निवासी अंसारी राजू हकीम मोहम्मद के साथ एक अजीब घटना हो गई. राजू के मोबाइल पर न तो किसी तरह का ओटीपी आया और न ही किसी तरह का लिंक ही राजू ने दबाया. इसके बावजूद राजू के खाते (यूपीआई ट्रांजेक्शन) से दो बार में एक लाख 92 हजार की निकासी हो गयी. राजू के मोबाइल पर रुपये निकासी का कोई मैसेज तक नहीं आया. राजू जब अपने खाते से राशि निकालने के लिए बैंक गया, तब उसे एक लाख 92 रुपये निकासी का पता चला.

साइबर थाना जांच में जुटी

बदहवास राजू ने पहले बैंक से अनुरोध कर सभी तरह के ट्रांजेक्शन पर रोक लगवाई. इसके बाद आवेदन लेकर 13 जून को प्राथमिकी दर्ज कराने स्थानीय थाना पहुंचा. आवेदन लेने के बाद थाना के तरफ से चार दिन बाद आने को कहा गया. बैंक की ओर से कार्रवाई करने की बात कहने पर बैंक ने थाना से एफआईआर नंबर की मांग की. परेशान राजू गुरुवार 18 जून को सेक्टर वन स्थित साइबर थाना पहुंचा. अपनी आपबीती इंस्पेक्टर अनिल कच्छप को सुनायी. इसके बाद श्री कच्छप ने साइबर सेल के पुलिस अधिकारियों को अविलंब कार्रवाई करने को कहा.

डिलिवरी मैन का काम कर जोड़े थे पैसे

राजू ने बताया कि वह महाराष्ट्र के थाणे जिला में फूड डिलिवरी का काम करता है. एक-एक पाई जमा कर रहे हैं, ताकि घर परिवार चला सके. फिलहाल बोकारो स्थित अपने चटनियाबागी घर आये हैं. 13 जून को बैंक पैसे निकासी करने गये थे. इसी दौरान पता चला कि नौ जून (94 हजार – अमीना के खाते में ट्रांजेक्शन) और 10 जून (98 हजार – कनुभाई प्रजापति के खाते में ट्रांजेक्शन) को खाते से यूपीआई द्वारा एक लाख 92 हजार दूसरे दो बैंक खाते में ट्रांजेकशन किया गया है. सभी जगहों पर ऑनलाइन शिकायत कर दी गई. इसके बाद थाना को आवेदन दिया.

क्या कहना है पुलिस का

साइबर थाना के इंस्पेक्टर अनिल कच्छप ने कहा कि भुक्तभोगी की शिकायत को सुनी गई है. मामले में तकनीकी तरीके से त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. मोबाइल चलाते वक्त हर किसी को सावधान रहने की जरूरत है. मोबाइल से वित्तीय लेन-देन की जानकारी किसी से न तो साझा करे और न ही किसी के समक्ष दिखाकर डिजिटल लेन-देन करें.

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Published by: AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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