बच्चों की थाली पर संकट! बोकारो में अप्रैल से नहीं मिली MDM की राशि, एक सितंबर से बंद हो सकता है भोजन

बोकारो के सरकारी स्कूलों में MDM की राशि नहीं मिलने से मध्याह्न भोजन बंद होने का संकट, उधारी ज्यादा होने से दुकानदार ने राशन देने से किया मना.

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन यानी पीएम पोषण योजना पर इन दिनों आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं. बोकारो जिले के किसी भी विद्यालय में अप्रैल 2026 से एमडीएम मद की राशि का भुगतान नहीं हुआ है.

करीब पांच महीने से राशि नहीं मिलने के बावजूद स्कूल प्रबंधन अब तक किसी तरह दुकानदारों से उधार राशन लेकर बच्चों का भोजन संचालित करता रहा. लेकिन लगातार बढ़ती उधारी ने अब इस व्यवस्था को भी संकट में डाल दिया है. कई विद्यालयों में दुकानदारों ने आगे राशन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं.

स्कूल पर 2 लाख के पार पहुंची उधारी

स्थिति का अंदाजा कसमार प्रखंड के क्षेत्रनाथ पीएम श्री प्लस टू उच्च विद्यालय, हरनाद से लगाया जा सकता है. यहां स्कूल प्रबंधन ने अप्रैल से अब तक बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए राशन उधार लिया. विद्यालय में इस अवधि में 105 दिन कक्षाएं चलीं और सभी 105 दिनों में बच्चों के लिए उधार के राशन से भोजन पकाया गया. अब विद्यालय पर राशन दुकानदार की उधारी बढ़कर 2,84,799 रुपये हो चुकी है.

यह फोटो एआई से बनाई गई है

विद्यालय के एमडीएम प्रभारी नंदकिशोर नायक के अनुसार, शुरुआत में यह उम्मीद थी कि जल्द ही विभाग से राशि मिल जाएगी और दुकानदार का भुगतान कर दिया जाएगा. इसी भरोसे में लगातार उधार लेकर भोजन की व्यवस्था जारी रखी गयी. लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी राशि नहीं मिली. अब दुकानदार ने आगे उधार देने से इनकार कर दिया है.

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एक सितंबर से बंद हो सकता है मध्याह्न भोजन

नायक बताते हैं कि करीब 2.85 लाख रुपये की उधारी विद्यालय के लिए बड़ी रकम है. दुकानदार लगातार बकाया भुगतान के लिए तगादा कर रहे हैं. एक ओर बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर राशन उपलब्ध कराने वाले दुकानदार का भुगतान नहीं हो पा रहा है. ऐसे में विद्यालय प्रबंधन के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है. अगर जल्द राशि नहीं मिली तो एक सितंबर से विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद करना मजबूरी बन सकती है.

हरनाद सिर्फ एक उदाहरण, संकट पूरे जिले में

हरनाद विद्यालय की यह स्थिति अकेली नहीं है, बल्कि पूरे बोकारो जिले के सरकारी विद्यालयों में एमडीएम भुगतान का संकट बना हुआ है. अप्रैल से किसी भी विद्यालय को एमडीएम मद में भुगतान नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन को स्थानीय स्तर पर उधारी के भरोसे योजना चलानी पड़ रही है.

यह फोटो एआई से बनाई गई है

जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां समस्या और गंभीर है. अधिक बच्चों के लिए हर रोज बड़ी मात्रा में चावल, दाल, सब्जी, तेल, मसाले और अन्य सामग्री की आवश्यकता होती है. ऐसे में हर दिन का खर्च बढ़ता जाता है और भुगतान नहीं होने पर उधारी भी तेजी से बढ़ती है.

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अब स्थिति यह है कि कई स्कूलों के एमडीएम प्रभारी दुकानदारों के लगातार तगादे से परेशान हैं. स्थानीय दुकानदार भी लंबे समय तक बिना भुगतान के राशन उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं हैं. छोटे दुकानदारों के लिए भी लाखों रुपये की राशि फंस जाना बड़ी समस्या है. इसका सीधा दबाव विद्यालय प्रबंधन पर पड़ रहा है.

बच्चों की थाली पर पड़ सकता है असर

सरकार की ओर से स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम पोषण योजना संचालित की जाती है. स्कूल आने वाले बच्चों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराना इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन राशि के भुगतान में लंबे समय से बनी स्थिति के कारण अब विद्यालयों के सामने योजना को जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है.

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चों का भोजन बंद करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है. इसलिए अब तक किसी तरह उधार लेकर व्यवस्था जारी रखी गयी. लेकिन जब दुकानदार ही आगे सामग्री देने से इनकार कर दें तो विद्यालय के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं.

10 सितंबर तक भुगतान की उम्मीद

इस संबंध में कसमार प्रखंड के एमडीएम प्रभारी राकेश रोशन ने भी स्वीकार किया कि भुगतान को लेकर समस्या पूरे जिले में है. उन्होंने बताया कि अप्रैल से एमडीएम मद की राशि का भुगतान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है और 10 सितंबर तक भुगतान होने की संभावना है. नये ऐप को लेकर भी काम चल रहा है.

स्कूल में भोजन करते बच्चे (प्रतिकात्मक फोटो)

अब विद्यालय प्रबंधन की नजर विभाग से होने वाले संभावित भुगतान पर टिकी है. अगर 10 सितंबर तक राशि उपलब्ध हो जाती है तो लंबे समय से उधारी में चल रही व्यवस्था को राहत मिल सकती है और दुकानदारों का बकाया चुकाया जा सकेगा. लेकिन तब तक विद्यालयों के सामने बच्चों की भोजन व्यवस्था को किसी तरह जारी रखने की चुनौती बनी रहेगी.

हरनाद विद्यालय की 2,84,799 रुपये की उधारी महज एक स्कूल का आंकड़ा नहीं, बल्कि उस व्यापक संकट की तस्वीर है जिसमें जिले के विद्यालय अप्रैल से बिना एमडीएम भुगतान के बच्चों की थाली भरने की कोशिश कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By दीपक सवाल

मैं दीपक सवाल, 1994 से प्रभात खबर से जुड़ा हूं। वर्ष 2011 से 2015 तक बोकारो कार्यालय में स्टॉफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत रह चुका हूं। 2015 से कसमार डेटलाइन से कार्यरत हूं। मेरा संपर्क नंबर : 9431145607

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