तलमड़िया (बोकारो): चास प्रखंड के एनएच कालापत्थर पानी टंकी मोड़ एवं बिजुलिया मोड़ के पूरब दामोदर नदी किनारे करीब सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुम्हरी का चेचका धाम प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. रमणीक प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर यह स्थल अब पिकनिक स्पॉट के रूप में भी पहचान बना चुका है. पौराणिक मान्यताओं से जुड़े विश्वास के कारण यह धाम आसपास के क्षेत्रों में लोक आस्था का केंद्र बन गया है.
सावन और मकर संक्रांति में उमड़ते हैं श्रद्धालु
मकर संक्रांति के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है और मेला लगता है. वहीं सावन महीने में भी शिवभक्तों का जुटान होता है. पूर्णिमा से पूर्णिमा तक हजारों शिवभक्त कांवर में जल लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. श्रद्धालु दामोदर नदी में स्नान करने के बाद चेचकाधाम मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं. बिहार और बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. सालभर पूर्णिमा, अमावस्या और सोमवार के दिन श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.
मंदिर परिसर में कई धार्मिक स्थलों का है संगम
चेचकाधाम परिसर में शिव मंदिर के अलावा माता पार्वती, काल भैरवी, शीतला माता, मां वैष्णवी, शनि मंदिर, बजरंगबली और नंदी मंदिर सहित कई धार्मिक स्थल हैं. मंदिर के पुजारी बाबा सरखेल, दिलीप पाठक, सुधीर पाठक, सदानंद उपाध्याय, बाबा मृत्युंजय, विजय उपाध्याय, विजय उर्फ बुलबुल उपाध्याय, कीर्तन उपाध्याय और नारायण तिवारी सहित अन्य लोग नियमित रूप से श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना कराते हैं.
विष्णु पदचिह्न और अज्ञात लिपि बना आकर्षण का केंद्र
चेचकाधाम में भगवान विष्णु के पदचिह्न, शंख, चक्र और गदा के चिह्न मौजूद हैं. इन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. वहीं, मंदिर के समीप चट्टान पर किसी अज्ञात लिपि में कुछ खुदा हुआ है, जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है. मंदिर के आसपास प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है. विष्णु पदचिह्न के समीप रमणीक दृश्य और बहता हुआ जोड़िया झरना लोगों को आकर्षित करता है, जो आगे चलकर दामोदर नदी में मिल जाता है. खास बात यह है कि मंदिर परिसर के चारों ओर हजारों बेल वृक्ष मौजूद हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव और विष्णु यहां प्रकट हुए थे.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की हुई पहल
चेचकाधाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए गए हैं. वर्ष 2001 में बोकारो के तत्कालीन उपायुक्त विमल कीर्ति सिंह के निर्देश पर चास के तत्कालीन बीडीओ जगबंधु महथा, प्रखंड साक्षरता समिति और कई कार्यकर्ताओं ने चेचकाधाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर रिपोर्ट सौंपी थी. पूर्व एलआरडीसी विजय किशोर ने भी इस दिशा में पहल की थी.
पुरातात्विक महत्व को लेकर विशेषज्ञों ने किया अध्ययन
वर्ष 2002 में दिल्ली से आई पुरातात्विक विभाग की टीम ने चेचकाधाम का निरीक्षण कर स्थल रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. इसके बाद धाम के विकास का कार्य शुरू हुआ. वर्ष 2015 में रांची विश्वविद्यालय के पुरातात्विक विभाग के हरेंद्र सिन्हा अपनी टीम के साथ यहां पहुंचे थे. टीम ने मंदिर को अति प्राचीन बताया था और ब्राह्मी लिपि में उकेरे गए संदेशों तथा भगवान विष्णु के पदचिह्नों की फोटोग्राफी की थी.
विकास कार्यों को मिली गति, सुविधाओं में हुआ विस्तार
वर्ष 2000 में पूर्व मंत्री समरेश सिंह ने भी चेचकाधाम के विकास की पहल शुरू की थी. इसके बाद लगातार इसके विकास के प्रयास किए जाते रहे हैं. भू-राजस्व, पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा मामलों के मंत्री रहते अमर कुमार बाउरी के प्रयास से विभाग की ओर से 41.48 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी. वहीं, बोकारो के पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने चेचकाधाम से विष्णु पदचिह्न और बहते झरने तक सीढ़ी निर्माण कराया है.
