Bokaro News : खदानों में पानी निकासी के लिए चल रहे दर्जनों मोटर, कॉलोनियों को कम मिल रही बिजली

Bokaro News : बेरमो में सीसीएल के बीएंडके, कथारा व ढोरी एरिया की खदानों में काफी मात्रा में पानी भर गया है.

राकेश वर्मा, बेरमो, इस वर्ष मानसून से काफी पहले ही बारिश शुरू हो जाने के कारण बेरमो में सीसीएल के बीएंडके, कथारा व ढोरी एरिया की खदानों में काफी मात्रा में पानी भर गया है. कुछ खदानों में तो पहले ही पानी भरा हुआ था. कुछ सूखी खदानें भी बारिश के कारण पानी से भर गया हैं. खदानों से पानी निकालना प्रबंधन के लिए चुनौती भरा काम हो गया है. तीनों एरिया की खदानों में अलग-अलग क्षमता का मोटर पंप लगा कर लगातार पानी निकाला जा रहा है. खदानों में लगे हैवी मोटर पंप के लगातार चलने के कारण कॉलोनियों की विद्युत आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है. 24 घंटे में 10 घंटा भी सही ढंग से बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. इएंडएम अभियंता के अनुसार दो हजार जीपीएम क्षमता का एक मोटर पंप लगातार चलने से 30-35 एम्पीयर बिजली की खपत होती है. खदानों में बिजली की खपत काफी बढ़ गयी है, इसलिए कॉलोनियों में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है.

बीएंडके एरिया की तीन परियोजनाओं में लगे हैं 11 मोटर पंप

बीएंडके एरिया अंतर्गत एकेके, कारो व बोकारो कोलियरी की खदानों में फिलहाल कुल 11 मोटर पंप लगा कर पानी की निकासी की जा रही है. एकेके परियोजना में दो हजार जीपीएम के दो, एक हजार जीपीएम के दो तथा तीन से चार हजार जीपीएम क्षमता का एक मोटर पंप इसके लिए लगाये गये हैं. पीओ सत्येंद्र सिंह के अनुसार रोजाना करीब 10 मिलियन गैलन पानी की निकासी इससे की जा रही है. जल्द ही एक और मोटर पंप लगाने की योजना है. कारो परियोजना की खदान में दो-दो हजार जीपीएम के दो मोटर पंप से पानी निकाला जा रहा है. पीओ एसके सिन्हा के अनुसार रोजाना चार मिलियन गैलन पानी की निकासी हो रही है. बोकारो कोलियरी में 12 सौ जीपीएम का एक, एक हजार जीपीएम का दो तथा 500 जीपीएम का एक मोटर पंप लगाया गया है. पीओ एनके सिंह के अनुसार रोजाना दो मिलियन गैलन पानी की निकासी हो रही है.

खदानों में पानी भरने से कोयला उत्पादन प्रभावित

ज्यादा बारिश होने और खदानों में पानी भर जाने के कारण बेरमो में सीसीएल के तीनों एरिया में मई से लेकर 10 जुलाई तक 10 लाख टन से ज्यादा कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ है. लगातार बारिश के कारण अंडर ग्राउंड व ओपेन कास्ट खदानों में पानी भरने का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि प्रत्येक वर्ष परियोजनाओं में प्रबंधन मानसून के पूर्व इसको लेकर तैयारी करता है. खुली खदानों में पानी की निकासी के लिए उच्च क्षमता के मोटर पंपों का इस्तेमाल किया जाता है. जिस जगह से कोयला निकाला जाता है, वह अक्सर बरसात में डूब जाता है. इस स्थिति में प्लानिंग कर ऊपरी हिस्से में कोयले का फेस तैयार किया जाता है. वहीं, बारिश होने पर खदान की कच्ची सड़कों पर फिसलन हो जाती है और हालपेक, डंपर व अन्य भारी मशीनों के आवागमन में परेशानी होती है. बरसात के दिनों में खदानों में अतिरिक्त प्रकाश की आवश्यकता होती है. बारिश में बिजली भी बाधित होती रहती है. गत वर्ष की तुलना में दुगुना से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >