बोकारो. बीएसएल टाउनशिप के सेक्टर-8 और सेक्टर-12 स्थित बीएसएनएल की आवासीय कॉलोनियां विभागीय उपेक्षा की कहानी बयां कर रही हैं. कभी कर्मचारियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले इन कॉलोनियों के क्वार्टर खंडहर में तब्दील हो रहे हैं. यहां रहने वाले अधिकतर कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं या वर्ष 2019-20 में लागू वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) के तहत सेवा छोड़ चुके हैं. इसके बाद दोनों कॉलोनियों के अधिकतर क्वार्टर खाली हो गये.
इसके बाद बीएसएनएल ने न तो इन क्वार्टरों के संरक्षण के लिए कोई ठोस पहल की और न ही इनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने आयी है. दोनों काॅलोनियों में कुल 14 क्वार्टर हैं. इनमें से अधिकतर क्वार्टरों का प्लास्टर झड़ चुका है. खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं. परिसर में झाड़ियां उग गयी हैं और जगह-जगह गंदगी फैली हुई है.
लोगों का कहना है कि सेक्टर-8 स्थित परिसर में बीएसएनएल का 4जी मोबाइल टावर पूरी क्षमता से संचालित हो रहा है और आसपास करीब 500 मीटर क्षेत्र में नेटवर्क सेवा उपलब्ध करा रहा है. यानी विभाग अपनी दूरसंचार सेवाओं को आधुनिक बनाने में जुटा है, लेकिन उसी परिसर में मौजूद करोड़ों रुपये की आवासीय संपत्ति उपेक्षा हो रही है.
असामाजिक तत्वों का अड्डा बनने का खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि खाली पड़े इन कॉलोनियों में कोई भी आसानी से प्रवेश कर सकता है. इससे चोरी, नशाखोरी और अन्य असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है. असामाजिक तत्वों का अड्डा बनने का खतरा है. लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गयी तो भविष्य में कोई अप्रिय घटना हो सकती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
धनबाद बीएसएनएल के महाप्रबंधक बीके झा ने कहा कि निगम फिलहाल "इन्वेस्टमेंट एंड रिटर्न पॉलिसी " के तहत कार्य कर रहा है. विभाग उन्हीं परिसंपत्तियों पर निवेश कर रहा है, जहां बेहतर उपयोग और आर्थिक प्रतिफल की संभावना है. बोकारो सेक्टर-8 और सेक्टर-12 स्थित खाली क्वार्टरों के संबंध में अंतिम निर्णय बीएसएनएल मुख्यालय के स्तर पर लिया जायेगा.
