Bokaro News : ट्रेजरी घोटाला : वर्ष 2025 में ही हुआ था गड़बड़ी का था खुलासा

Bokaro News : ट्रेजरी घोटाला को लेकर वर्ष 2025 में ही गड़बड़ी का खुलासा हुआ था.

झारखंड में ट्रेजरी घोटाला इस साल चर्चा में रहा. बोकारो में इसका खुलासा हुआ और कई अन्य जिलाें भी इस तरह का घोटाला पकड़ में आया. अप्रैल 2026 में बोकारो ट्रेजरी से 10 करोड़ रुपया से अधिक राशि के गलत तरीका से भुगतान का खुलासा हुआ था. लेकिन, 25 अगस्त 2025 को ही कैग की रिपोर्ट में बोकारो ट्रेजरी से गलत तरीके से भुगतान होने के संबंध में खुलासा किया गया था. जून 2007 से नवंबर 2022 तक झारखंड में एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सूचना प्रौद्योगिकी ऑडिट में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने पाया कि बोकारो जिला में गलत पीपीओ नंबर दर्ज होने के कारण अनैतिक भुगतान हुआ है. इस दौरान 31,46,007 रुपया का अतिरिक्त भुगतान मृत्यु सह सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी में किया गया. वहीं पेंशन के परिवर्तित मूल्य में 4,92,427 रुपया का अतिरिक्त भुगतान किया गया. लेकिन, प्रशासनिक महकमा की नींद नहीं खुली. रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया था कि ट्रेजरी भुगतान में कई लूप हैं. कैग की रिपोर्ट में सामने आया था कि विभागीय गलती के कारण एक ही पेंशनभोगी को दूसरे पेंशनभोगी के स्थान पर दो बार भुगतान किया गया.

एक साथ तीन स्तर पर हो रही है जांच

अब बोकारो में ट्रेजरी घोटाला सामने आया तो एक साथ तीन स्तर पर जांच चल रही है. सीआइडी के एडीजी मनोज कौशिक ने आइजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में नौ सदस्यीय एसआइटी का गठन किया है. इधर, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच समिति भी इस संबंध में जांच कर रही है. इसे जुलाई तक फाइनल रिपोर्ट जमा करना है. इधर जिला की ओर से बनायी गयी एक जांच टीम ने अंतरिम रिपोर्ट जमा कर दी है. हालांकि, फाइनल रिपोर्ट को लेकर अभी इंतजार करना होगा. विभागीय जानकारों के मुताबिक जांच में कई अधिकारी व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है. सीआइडी ने आरोपियों द्वारा अवैध कमाई से बनायी गयी संपत्तियों का भी खुलासा किया. अब तक की कार्रवाई में बोकारो के तेलीडीह स्थित 4.08 डिसमिल भूमि पर निर्मित तीन मंजिला मकान व अन्य 4.98 डिसमिल भूमि के दस्तावेज जब्त किये गये हैं. इसके अलावा, विभिन्न बैंकों में हस्तांतरित एक करोड़ 93 लाख रुपये और 18 लाख रुपये के फिक्स डिपॉजिट को फ्रीज किया गया है.

इडी की भी हुई इंट्री

मामले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने भी जांच शुरू कर दी है. करोड़ों रुपया के सरकारी राशि के गबन से जुड़े मामले को गंभीर मानते हुए इडी ने 14 मई को इसीआइआर दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच तेज कर दी है. एजेंसी यह पता लगा रही है कि अवैध निकासी के जरिये प्राप्त राशि का इस्तेमाल कहां व किस प्रकार किया गया.

कैग की रिपोर्ट में दिये थे कई सुझाव

कैग की रिपोर्ट में सुझाव भी दिया गया था. इसमें कहा गया था कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए फंड व ऋण प्रबंधन मॉड्यूल के विकास को प्राथमिकता देना चाहिए. वहीं इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम का एकीकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उपयुक्त वैधीकरण नियंत्रण लागू किया जा सकता है, ताकि किसी प्राधिकरण के विरुद्ध एक से अधिक बार दावों के प्रसंस्करण के जोखिम से बचा जा सके. इंटीग्रेटेड सिस्टम में उपयुक्त नियंत्रण अंतर्निहित हों, ताकि प्रणाली में पहले से उपलब्ध डेटा को प्राप्त कर भुगतान संबंधी फिल्ड को केवल-पठन मोड में स्वतः भरा जा सके. मानवीय त्रुटियों से बचा जा सके. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि प्रणाली में उचित प्राथमिक कुंजी, संदर्भीय अखंडता लागू किया जा सकता है. साथ ही भुगतान एप्लिकेशन इंटरफेस में वैध इनपुट नियंत्रण प्रदान कर सकती है, ताकि अधिक भुगतान के जोखिम से बचा जा सके.

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