बोकारो. बोकारो इस्पात संयंत्र के तकनीकी सेल विभाग की ओर से डिजाइन एवं इंजीनियरिंग विषय पर आयोजित दो दिवसीय ‘लियो’ (लर्निंग फ्रॉम ईच अदर) कार्यशाला का समापन हुआ. सेल स्तर पर अपनी तरह की यह पहली पहल रही, जिसमें बोकारो, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर और इस्को (बर्नपुर) इस्पात संयंत्रों के डिजाइन एवं इंजीनियरिंग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
कार्यशाला का उद्देश्य अंतर-संयंत्र ज्ञान साझा करना, तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करना, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान और आधुनिक इंजीनियरिंग पद्धतियों को साझा करने के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराना था. समापन सत्र में अधिशासी निदेशक (संकार्य) मुख्य रूप से उपस्थित रहे. उनके साथ मुख्य महाप्रबंधक (टेक्नीकल सेल) समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.
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विशेषज्ञों ने साझा किये अनुभव और तकनीकी समाधान
दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान विभिन्न इस्पात संयंत्रों से आये प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, तकनीकी ज्ञान, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नवीन समाधानों को साझा किया. डिजाइन एवं इंजीनियरिंग से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों, उनके समाधान और प्रक्रियाओं में सुधार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई.
अधिशासी निदेशक (संकार्य) ने तकनीकी सेल विभाग की इस पहल की सराहना की. उन्होंने इसे इंजीनियरिंग क्षमता को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने सेल की विभिन्न इकाइयों के बीच सामूहिक ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के मानकीकरण और तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया.
प्रतिभागियों और विजेताओं को किया गया सम्मानित
समापन सत्र में कार्यशाला के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों के विजेताओं और प्रतिभागी प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया. मुख्य महाप्रबंधक (टेक्नीकल सेल) ने सेल की विभिन्न इकाइयों की मौजूदा डिजाइन क्षमताओं और सुधार की संभावनाओं से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की.
उन्होंने आधुनिक इंजीनियरिंग टूल्स और उन्नत सॉफ्टवेयर के प्रभावी इस्तेमाल, तकनीकी दक्षताओं के विकास तथा अंतर-संयंत्र समन्वय को और मजबूत करने के लिए प्रस्तावित भावी कार्ययोजना की रूपरेखा भी साझा की.
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तकनीकी उत्कृष्टता और ज्ञान-साझाकरण पर जोर
कार्यशाला ने बोकारो इस्पात संयंत्र की तकनीकी उत्कृष्टता, नवोन्मेषी सोच और निरंतर सीखने की संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया. अधिकारियों के अनुसार, सेल की विभिन्न इकाइयों के बीच अनुभव और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान से मजबूत और सहयोगात्मक तकनीकी कार्य-संस्कृति विकसित करने में मदद मिलेगी.
