रंजीत कुमार, बोकारो, बोकारो जिले में छह माह में 50 लोगों ने आत्महत्या कर ली है. मतलब हर तीन दिन में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है. आत्महत्या करनेवालों में सेलकर्मी, रेलकर्मी, व्यवसायी, निजी कामगार व विद्यार्थी शामिल है. हर आत्महत्या के पीछे तनाव व इगो को प्रमुख माना जा रहा है. केवल दिसंबर के आंकड़ों पर गौर करें, तो हरला थाना क्षेत्र में तीन लोगों ने एक सप्ताह के अंदर आत्महत्या कर ली. सेक्टर चार जी निवासी हरिशंकर पांडेय ने कूलिंग पौंड में कूद कर अपनी जान ले ली. जबकि सेक्टर नौ बी पांच स्ट्रीट में कर्ज के बोझ को लेकर परेशान दंपती (पति-पत्नी) ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. इससे पूर्व दंपती ने अपने दो वर्षीय पुत्र का गला घोट कर मार दिया. घटना ने बोकारोवासियों के साथ बुद्धिजीवियों की चिंता बढ़ा दी है. सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ प्रशांत कुमार मिश्र के अनुसार समाज, घर व परिवार का दवाब अधिक होता है. घरवालों के सपनों का दबाव झेलते हैं. सामाजिक प्रतिष्ठा के चक्कर में दबाव झेल नहीं पाते. इस कारण आत्महत्या को अंजाम दे जाते हैं.
आत्महत्या से पहले आता है तनाव… पहचानें
डॉ मिश्र ने कहा कि आत्महत्या से पहले तनाव सामने आता है, जो व्यवहार में परिवर्तन लाता है. ऐसे में सिर में दर्द, शरीर में पीसना, शरीर में थरथराहट होना, उदास रहना, किसी काम में दिल ना लगना, ज्यादा सोना या कम सोना, किसी बात पर ध्यान ना देना, क्रोध या चिड़चिड़ापन, हिंसक व्यवहार, भावनात्मक आवेग, शराब या ड्रग की आदत, घबराहट की आदत आदि संकेत के रूप में सामने आता है.एक मनोचिकित्सक हर माह 360 मरीजों की करते हैं काउंसेलिंग
बोकारो में तनाव को लेकर हर माह 10 से 12 युवा आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाते हैं. आत्महत्या करनेवालों में 18 से 40 वर्ष तक के युवा शामिल हैं. लगातार तनाव बढ़ने की वजह से आत्महत्या की संख्या में इजाफा हो रहा है. मनोचिकित्सक आत्महत्या जैसी घटना को संवेदनशीलता के साथ जोड़कर देखते हैं. अभिभावकों द्वारा बच्चों के साथ कम समय व्यतीत करना भी प्रमुख कारण मान रहे हैं. एक चिकित्सक के पास एक ओपीडी में 30 से 35 मरीज काउंसेलिंग के लिए आते हैं. लगातार बढ़ रही संख्या हैरान करने वाली है.मानसिक तनाव से लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने काउंसेलिंग की व्यवस्था की है. मनोचिकित्सक 24 घंटे फोन पर उपलब्ध रहते हैं. सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ प्रशांत मिश्र ने वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक 3670 लोगों को काउंसेलिंग की. साथ ही सदर अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में सप्ताह में तीन ओपीडी में जांच करते है. हर ओपीडी में 40 से 50 मरीज तनाव की समस्या लेकर आते है. इसमें 30 से 35 मरीज तनाव से ग्रस्त मिलते है. डॉ मिश्र ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृति एक दिन में नहीं बनती है. लगातार तनावग्रस्त रहने के बाद मन कुंठित होने लगता है. जब कोई मनोभाव को नहीं समझता है. इसके बाद आत्महत्या जैसे ख्याल मन में आते है.
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