Bokaro News : संबंधों के कारण हुई पीड़ा ही असली दुख, ज्ञानी इससे विचलित नहीं होते : विकासानंद

Bokaro News : आनंद मार्ग प्रचारक संघ का तीन दिवसीय वार्षिक धर्म महासम्मेलन शुरू, प्रभात संगीत गायन, कीर्तन व सामूहिक ध्यान से हुई शुरुआत.

बोकारो, आनंद मार्ग प्रचारक संघ का तीन दिवसीय वार्षिक धर्म महासम्मेलन गुरुवार को आनंदनगर में शुरू हुआ. शुरुआत प्रभात संगीत गायन, कीर्तन व सामूहिक ध्यान से हुई. मार्ग गुरु प्रतिनिधि आचार्य विकासानंद अवधूत ने श्रीश्री आनंदमूर्ति के दर्शन पर आधारित आध्यात्मिक प्रवचन दिये. आचार्य विकासानंद ने कहा कि परमात्मा अनंत है, किंतु उसे प्राप्त कर सकते हैं. सांसारिक वस्तु क्षणिक सुख देती हैं, पर उनके खोने का दुख उस सुख से गहरा होता है. संसार में दिखाई देने वाला अधिकांश दुख वस्तु या संबंधों की हानि से उपजी पीड़ा है. ज्ञानी व्यक्ति इस पीड़ा से इसलिए विचलित नहीं होते, क्योंकि वे जानते हैं कि दुख का मूल कारण बाहरी घटना नहीं, बल्कि अपने ही संस्कार हैं. आचार्य ने कहा कि संस्कार अतीत व वर्तमान कर्म की प्रतिक्रिया है. सुख व दुख से उत्पन्न संस्कार चेतना की गति को दिशा देते हैं. आचार्य ने कहा कि जिस व्यक्ति का मन अनंत सत्ता को चिंतन का विषय बना लेता है. वह वस्तुतः परमात्मा के साथ पहचान स्थापित कर लेता है. मनुष्य का स्वभाव परिमित से अनंत की ओर भाग से संपूर्ण की ओर बढ़ने का है. यह प्रवृत्ति आत्म-संरक्षण व सुख-प्राप्ति की मूल इच्छा से उत्पन्न होती है. किंतु जब तक लक्ष्य सीमित रहता है, तब तक शाश्वत सुख संभव नहीं होता. आचार्य ने कहा कि बंधन और मुक्ति का मार्ग इकाई का व्यक्तित्व अपने आप में पूर्ण नहीं है. इसलिए जब तक वह स्वयं को संपूर्ण सत्ता में विलीन नहीं करता, तब तक दुख से पूर्ण मुक्ति संभव नहीं. साधकों का कष्ट भी उन्हीं संस्कारों का परिणाम होते हैं. जिन्हें उन्होंने स्वयं अपने कर्मों से निर्मित किया है. इसलिए प्रतिक्रियाओं से भयभीत होने या ब्रह्म पर अन्याय का आरोप लगाने का कोई आधार नहीं है.

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Published by: Anand kumar upadhyay

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