बोकारो, आनंद नगर में आनंद मार्ग प्रचारक संघ धर्म महासम्मेलन के तीसरे दिन शनिवार को प्रभात संगीत, बाबा नाम केवलम कीर्तन, सामूहिक ध्यान व प्रवचन हुआ. गुरु प्रतिनिधि आचार्य विकासानंद ने कहा कि ईश्वर प्रेम जीवन यात्रा को सुगम व सहज बना देता है. जिन लोगों के भीतर ईश्वर प्रेम होता है, उनके भीतर का रास्ता अपने आप साफ होने लगता है. आचार्य ने कहा कि भक्ति-पथ पर चलने वालों में एक स्वाभाविक साहस जन्म लेता है. एक ऐसा साहस, जो मन को भीतर से शुद्ध करता है. यही शुद्ध स्थिति ईश्वर प्रेम की आधारशिला है. जहां मन किसी आध्यात्मिक सत्य की ओर बढ़ता है, वहीं प्रेम जन्म लेता है. ईश्वर की ओर बहने वाली यह निरंतर मानसिक लहर मनुष्य की सबसे श्रेष्ठ उपलब्धि है. ऐसा भाव केवल मानव मन ही विकसित कर सकता है, क्योंकि उसमें विशालता व गहराई दोनों हैं. आचार्य ने कहा कि भविष्य में विज्ञान की प्रगति के साथ संभव है कि मनुष्य के निकट रहने वाले कुछ अन्य जीव भी ऐसे ऊंचे मानसिक स्तर तक पहुंच सके. मनुष्य के सान्निध्य में कुछ पशु मनुष्यों से भी अधिक संवेदनशील व आध्यात्मिक अनुभव के प्रति ग्रहणशील दिखाई देते हैं. इसी भावना को समझाने वाला एक प्रसंग अत्यंत शिक्षाप्रद है. ईश्वर प्रत्येक कण में है. भक्त के लिए भेदभाव, ऊंच-नीच या अस्पृश्यता जैसी धारणाओं का कोई अर्थ नहीं. आचार्य ने कहा कि मनुष्य अन्य जीवों से श्रेष्ठ इसलिए माना गया है, क्योंकि वह एकत्व-बोध को समझ सकता है. जो पशु मनुष्यों के पास रहते हैं, वे मनुष्य के प्रेम, दया व संवेदना से प्रभावित होकर एक ईश्वर प्रिय मानसिकता विकसित कर लेते हैं. ईश्वर प्रेम रखने वाला व्यक्ति कभी किसी का शोषण नहीं कर सकता. ना वह अन्याय को सहन करता है व ना अत्याचार को चुपचाप स्वीकार करता है. आनंद मार्ग प्रचारक संघ की सांस्कृतिक शाखा रेनेसां आर्टिस्ट्स व राइटर्स एसोसिएशन ने प्रभात संगीत पर आधारित एक सांस्कृतिक शाम का आयोजन किया.
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