Bokaro News : भविष्य की शिक्षा पर मंथन
Bokaro News : शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) कैंप टू में शब्द सरिता महोत्सव पुस्तक मेले के समापन पर गूंजे कवियों के स्वर.
बोकारो, शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) कैंप टू में आयोजित दो दिवसीय शब्द सरिता महोत्सव पुस्तक मेला के अंतिम दिन गुरुवार को भविष्य की शिक्षा पर मंथन हुआ. विषय था : ‘जब मशीनें सोचना शुरू कर देंगी, तो हम बच्चों को कैसे शिक्षित करेंगे’ जिसने विद्यार्थियों, शिक्षकों व उपस्थित श्रोताओं को चिंतन के लिए प्रेरित किया. सत्र के अंत में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद हुआ, जिसमें भविष्य की शिक्षा, तकनीक व मानवीय मूल्यों के संतुलन पर चर्चा देखने को मिली. सांस्कृतिक सत्र में झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित नृत्य प्रस्तुति ने मन मोह लिया. कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कविता पाठ भी प्रस्तुत किया. साहित्यिक जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसइ) अतुल कुमार चौबे ने ‘बड़ी नाजुक है यह मंजिल’ कविता/गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी. संथाली नृत्य (जागो जगाओ ग्रुप) ने नृत्य-नाट्य प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ‘सोनार झारखंड‘ की संकल्पना में नृत्य की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो समाज को ऊर्जावान एवं जागरूक बनाती है. वहीं शाम में आयोजित कवि सम्मेलन में लेखक, कवि और सिंगर साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता नीलोत्पल मृणाल ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण व यथार्थवादी कविताओं से बोकारो को मंत्रमुग्ध कर दिया. उनकी कविताओं में समकालीन मुद्दों, जैसे पर्यावरण (अरावली), राजनीति व समाज का यथार्थ झलका. इससे पहले डीसी अजय नाथ झा ने नीलोत्पल मृणाल का स्वागत किया. इससे पहले कार्यक्रम की शरुआत कवयित्री पद्मिनी शर्मा ने मां शारदे की वंदना से की.
साहित्य समाज को नयी दृष्टि देता है : नीलोत्पल
नीलोत्पल मृणाल ने कहा कि साहित्य समाज को नयी दृष्टि देता है. ऐसे आयोजन निरंतर होने चाहिए. उन्होंने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की. नीलोत्पल मृणाल के नौकरीपेशा जीवन की विडंबनाओं पर आधारित गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. कॉलेज के दिन याद करूं, तो लगता था चौहान और धीरे-धीरे लोहा पिघल गया… जैसी पंक्तियों ने युवावस्था के सपनों और वर्तमान की कठोर सच्चाइयों को उजागर किया. अब रवैये की तलवार चली गयी है – देखिए, सिकंदर नौकरी की वजह से हार गया…पर श्रोताओं ने तालियों के साथ गहरी सहमति जतायी. कवि की प्रस्तुति का सबसे मार्मिक हिस्सा उन युवाओं पर केंद्रित रहा, जिन्होंने अपने जीवन को संघर्ष की भट्ठी में तपाया.
इन्होंने किया काव्य पाठ
कवयित्री गीता कुमारी ने नववर्ष और बसंत ऋतु पर आधारित शृंगार रस की कविता – जो तुम संग हो साजन मेरे, मेरा हर रंग बसंती है प्रस्तुत कर प्रेम, सौंदर्य और उल्लास की अनुभूति करायी. डीसीएलआर चास प्रभास दत्ता ने स्वयं को कवि बताते हुए संघर्ष और आशा से भरी रचना सुनाई. उन्होंने निराशा ने रोका बहुत, तकलीफों ने टोका बहुत…, आज रुक रही है सांसें जरूर-आओ फिर जिंदगी सलाम,से श्रोताओं को प्रेरित किया. जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी शक्ति कुमार ने दैनिक जीवन से जुड़ी संवेदनशील कविताएं प्रस्तुत कीं. चिन्मय विद्यालय की शिक्षिका ज्योति दूबे और छात्रा वैष्णवी ने जीवन की हार-जीत और संघर्ष को पक्षी की उड़ान के प्रतीक के माध्यम से प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी. मौके पर विभिन्न जिला के अधिकारियों के साथ-साथ काफी संख्या में बोकारोवासी मौजूद थे.
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