यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो बोकारो भविष्य में बूंद-बूंद के लिए तरस जायेगा. भारत सरकार की डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स 2025 की रिपोर्ट बता रही है कि जिला में शुद्ध भूजल साल-दर-साल कम हो रहा है. मात्र 9958.02 एचएएम शुद्ध भूजल बचा है. भयावहता इससे समझी जा सकती है कि दो साल में 2543 एचएएम की कमी आयी है. वर्ष 2023 में जिला में 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल था. वर्ष 2022 की रिपोर्ट में यह 20653.26 एचएएम था.
दोहन में आयी है तेजी
रिपोर्ट की माने तो जिला में भूजल का दोहन हर साल बढ़ रहा है. 2025 की रिपोर्ट के अनुसार
49.45 प्रतिशत भू जल का
दोहन किया जा रहा है. जबकि, 2023 की रिपोर्ट में यह 42 व 2022 में 30 प्रतिशत था. यह स्थिति तब है जब जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल से जल पहुंचाने की दिशा में काम हो रहा है. जिला की आधी आबादी तक योजना का लाभ पहुंचाया भी जा चुका है. रिचार्ज नहीं हो पा रहा है भूमिगत जल चिंता यह भी है कि भूमिगत जल
रिचार्ज नहीं हो रहा है. 2025 की रिपोर्ट के अनुसार जिला में 20545.57 एचएएम भू जल
रिचार्ज हुआ है. यह 2023 के मुकाबले 1975.13 एचएएम कम है. 2025 की रिपोर्ट के अनुसार मानसून के समय वर्षा से 15774.46 एचएएम व बिन मानसून के समय वर्षा से 1993.99 एचएएम भू जल
रिचार्ज हुआ.
खेतीबाड़ी व उद्योग से अधिक घरेलू खपतजिला में 9190.74 एचएएम भू जल का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिला में सबसे अधिक 4563.81 एचएएम भू जल की खपत घरेलू उपयोग में होती है. इसके बाद सिंचाई के लिए 2413 एचएएम और उद्योग में 2213.91 एचएएल भू जल का इस्तेमाल किया जाता है.
बेरमो प्रखंड में स्थिति द से बदतर
रिपोर्ट के अनुसार सबसे बदतर स्थित
बेरमो प्रखंड की है. अन्य सभी आठन प्रखंड सेफ जोन में आते हैं. गुणवत्ता की बात करें तो जिला का तीन प्रखंड का भूजल पेयजल के लिहाज से अच्छा नहीं माना जा सकता है. गोमिया, चास व पेटरवार प्रखंड के भू जल में फ्लोराइड की मात्रा पायी गयी है.
Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.