Bokaro News : चिन्मय विद्यालय के कैंप में नैतिक शिक्षा के साथ अध्यात्म का पाठ पढ़ रहे बच्चे

Bokaro News : हरि सेवा कैंप के 11वें संस्करण में 100 से अधिक बच्चे ले रहें हिस्सा, बोलीं संयुक्तानंद : नैतिक शिक्षा ईमानदारी, सम्मान व जिम्मेदारी जैसे मूल्यों से सही-गलत का ज्ञान देती है.

बोकारो, चिन्मय विद्यालय बोकारो के हरि सेवा कैंप में बच्चे नैतिक शिक्षा के साथ अध्यात्म का पाठ पढ़ रहे हैं. इस दौरान बच्चों ने सद्गुरु सदाफलदेव आदर्श गौशाला-बहादुरपुर व आशालता दिव्यांग केंद्र-सेक्टर पांच का भ्रमण, श्री अय्यपा मंदिर सेक्टर पांच में संध्या आरती व चिन्मय विद्यालय बोकारो में भजन संध्या. चिन्मय मिशन बोकारो की आवासीय आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती की नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा की जानकारी ली. हरि सेवा कैंप के 11वें संस्करण में 100 से अधिक बच्चे शामिल हो रहे हैं. चिन्मय विद्यालय के आधा दर्जन से अधिक स्कूल के बच्चे कैंप में शामिल हैं. इनमें चिन्मय विद्यालय-जमशेदपुर, चिन्मय विद्यालय राउरकेला, चिन्मय विद्यालय बिष्टुपुर, चिन्मय विद्यालय गुवाहाटी, चिन्मय विद्यालय उत्तर प्रदेश, चिन्मय विद्यालय देवगढ़ व चिन्मय विद्यालय बोकारो के बच्चे शामिल हैं. सभी बच्चे उत्साह और उमंग के साथ कैंप में शामिल हो रहे हैं. चिन्मय मिशन बोकारो की आवासीय आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती ने कहा कि नैतिक शिक्षा बच्चों को ईमानदारी, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों के माध्यम से सही-गलत का ज्ञान देती है, जबकि अध्यात्म बच्चों को निरपेक्ष मूल्यों में विश्वास दिलाकर व आत्मा को परिपूर्ण बनाकर उनके चरित्र को मजबूत करता है. दोनों मिलकर बच्चों में विचारशीलता, भिन्नता के प्रति सम्मान व आत्म-सम्मान जैसे व्यक्तिगत गुणों को विकसित करते हैं, जो उन्हें समाज का जिम्मेदार व मूल्यवान सदस्य बनने में मदद करते हैं. चिन्मय विद्यालय के अध्यक्ष बिस्वरूप मुखोपाध्याय ने कहा कि नैतिक शिक्षा बच्चों को मजबूत चरित्र और सत्यनिष्ठा विकसित करने में मदद करती है. बच्चे सही और गलत के बीच अंतर करना सीखते हैं. प्रभावी निर्णय लेने में सक्षम होते हैं. सहानुभूति, निष्पक्षता, करुणा व दूसरों के प्रति सम्मान जैसे गुण विकसित होते है. चिन्मय विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी ने बच्चों में अध्यात्म के लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि अध्यात्म आत्मा को परिपूर्ण बनाता है. बच्चों में निरपेक्ष मूल्यों में विश्वास पैदा करता है. अध्यात्म विचारशीलता, स्वतंत्रता व आत्म-सम्मान जैसे मूल्यों को विकसित करने में मदद करता है. प्राचार्य सूरज शर्मा ने कहा : आध्यात्मिक शिक्षा बच्चों में आत्म-जागरूकता पैदा करती है, जो उनके जीवन के अनुभवों और निर्णयों का मार्गदर्शन करती है. जब बच्चे नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा एक साथ प्राप्त करते हैं, तो वे एक व्यापक दृष्टिकोण विकसित करते हैं. वे सीखते हैं कि कैसे सम्मानजनक तरीके से व्यवहार करना है (नैतिक शिक्षा) और कैसे अपने भीतर के मूल्यों और विश्वासों से जुड़ना है (अध्यात्मिक शिक्षा). उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार व हेड मास्टर गोपाल चंद्र मुंशी ने संयुक्त रूप से बताया : कैंप के माध्यम से बच्चे सेवा का भाव सीख रहे हैं.

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