बोकारो, दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस (एसइआरएमसी) ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया है. संगठन के महामंत्री एनएल कुमार ने कहा कि रेलवे की रीढ़ माने जाने वाले रेलकर्मी को 17951 रुपये का बोनस की घोषणा करके धोखा दिया है. उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग पर वेतन और भत्ते देने का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन उत्पादकता लिंक्ड बोनस (पीएलबी) पिछले 10 सालों से छठें वेतन आयोग के हिसाब से ही तय किया जा रहा है. परिणामस्वरूप इस वर्ष भी रेलकर्मियों की जेब में सिर्फ 17951 रुपये का बोनस आया है, जो उनकी मेहनत और रेलवे की बढ़ती कमाई के सामने ऊंट के मुंह में जीरा है. श्री कुमार ने कहा कि जब हर साल रेलवे की माल ढुलाई और टिकट बिक्री से अरबों की कमाई हो रही है, तब बोनस में बढ़ोतरी क्यों रोकी जा रही है? जबकि कोयला कर्मियों के बोनस में हर साल इजाफा होता है. यह सरकार की रेलकर्मियों के साथ सीधी नाइंसाफी है. केंद्रीय स्तर पर दोनों फेडरेशन को मुखर विरोध करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा आम जनता के बीच झूठा प्रचार करते हैं कि रेलकर्मियों को ‘78 दिनों का बोनस’ दिया गया है, जबकि असलियत में बोनस की राशि केवल 17951 रुपये ही है. यह ना तो सम्मानजनक है और ना ही मेहनत के अनुरूप. दपू रेलवे मेंस कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि बोनस की यह राशि रेलकर्मियों के साथ अपमान और तिरस्कार है. यदि सरकार ने तत्काल सातवें वेतन आयोग के अनुसार बोनस की गारंटी नहीं दी, तो रेलकर्मी आंदोलन की राह पकड़ने को बाध्य होंगे.
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