दीपक सवाल, कसमार, कसमार प्रखंड की सेवाती घाटी इन दिनों लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के कारण गंभीर चिंता का विषय बन गयी है. झारखंड और पश्चिम बंगाल की अंतर्राज्यीय सीमा पर स्थित यह घाटी अब स्थानीय लोगों के बीच ‘हादसों की घाटी’ के नाम से जानी जाने लगी है. ग्रामीणों के अनुसार घाटी की सड़क की अत्यधिक ढलान, संकरी बनावट और तकनीकी खामियां दुर्घटनाओं की मुख्य वजह हैं. ढलान में उतरते समय वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे बाइक, कार और अन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं. सेवाती घाटी सड़क के पुनर्निर्माण और ढलान सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन अब तक सरकार के स्तर से कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. परिणामस्वरूप इस मार्ग से गुजरने वाले लोग रोज जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं.
स्थानीय निवासी मनोज महतो, रूपेश कुमार महतो, मनेस राम मुंडा, गोविंद मुंडा, ईश्वर मुंडा आदि ग्रामीण कहते हैं कि इस घाटी का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है. यह मार्ग कसमार, पेटरवार और आसपास के इलाकों को पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती झालदा, बाघमुंडी और अयोध्या पहाड़ से जोड़ता है. यही रास्ता आगे सिल्ली, मुरी और रांची जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंच प्रदान करता है. नौकरी, व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए प्रतिदिन सैकड़ों लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं. इसके अलावा सेवाती घाटी झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध मवेशी बाजारों तक पहुंच का भी प्रमुख रास्ता है. किसान और व्यापारी मवेशियों की खरीद-बिक्री के लिए इसी मार्ग से आवाजाही करते हैं. अंतर्राज्यीय संपर्क के कारण इस सड़क का आर्थिक और सामाजिक महत्व अत्यधिक है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सेवाती घाटी सड़क का वैज्ञानिक ढंग से पुनर्निर्माण कर ढलान और सुरक्षा मानकों में सुधार किया जाये, ताकि लगातार हो रही जान-माल की क्षति को रोका जा सके.अब-तक हो चुकी है कई दुर्घटनाएं
सेवाती घाटी में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला नया नहीं है. बीते कुछ वर्षों में यहां कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं. 14 अक्तूबर 2023 को घाटी में बाइक खाई में गिर जाने से मधुकरपुर निवासी 22 वर्षीय विश्वजीत नायक की मौत हो गयी थी. इससे पहले 27 मार्च 2022 को मवेशी लदा एक ट्रैक्टर पलट गया, जिसमें चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था. सात जुलाई 2020 को ट्रैकर वाहन के लुढ़क जाने से झालदा थाना क्षेत्र के गुड़ीडीह निवासी धनंजय करमाली के 28 वर्षीय पुत्र विष्णु कर्मकार की जान चली गयी थी. वहीं छह नवंबर 2019 को भी एक ट्रेकर के पलटने से कई लोग जख्मी हुए थे. गुरुवार को बाइक खाई में गिर जाने से खैराचातर के सदानंद जायसवाल एवं बलदेव दे घायल हो गये. इन घटनाओं के अलावा भी छोटी-बड़ी अनेक दुर्घटनाओं में लोग घायल हुए हैं और जान-माल का नुकसान झेल चुके हैं, जिससे सेवाती घाटी को लगातार खतरनाक मार्ग के रूप में देखा जाने लगा है.क्या कहते हैं अभियंता
कनीय अभियंता शैलेंद्र कुमार के अनुसार सेवाती घाटी में बनी सड़क आवागमन योग्य तो है, लेकिन इसका एलाइनमेंट और ज्यामितीय डिजाइन तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है. कनीय अभियंता का मानना है कि यदि सड़क का पुनः तकनीकी सर्वे कर वैज्ञानिक ढंग से री-एलाइनमेंट, ग्रेड सुधार और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं, तो सेवाती घाटी में होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
