कोयला मजदूरों के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहे बिंदेश्वरी दुबे की पुण्यतिथि 20 जनवरी है. आज के परिदृश्य में उनके राजनीति सरोकार की प्रासंगिकता और भी बढ़ गयी है. वे बेरमो से पांच बार विधायक रहे थे. 1940-50 के दशक में बिहार के भोजपुर से बेरमो आये थे. वर्ष 55-56 में अंग्रेजों की कंपनी एसएलपी में टर्नर की नौकरी की. एक ओर कोयला श्रमिकों के जीवन को सुख की छाया प्रदान की, तो दूसरी ओर कोयला श्रमिकों की शक्ति को अपने श्रम से सत्ता की राजनीति के सफर की शुरुआत की. बेरमो के बाद पूरे बिहार और फिर बाद में कोयला मजदूरों के मसीहा के रूप में उनकी छवि बन गयी. कोयला मजदूरों को उन्होंने उनके पसीने की कीमत बतायी थी. 70 के दशक में बेरमो बाजार के मजदूर टॉकिज के पास बिंदेश्वरी दुबे का कल्पना प्रिटिंग प्रेस था. इसे उन्होंने अपने भाई बचन दुबे के लिए पार्टनरशिप में खोला था. बाद में यह प्रेस कतरास चला गया. बिंदेश्वरी दुबे ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बेरमो के इंटक नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह को बनाया था. राजेंद्र प्रसाद सिंह बेरमो से रिकाॅर्ड छह बार विधायक बने. बिहार व झारखंड में मंत्री के अलावा इंटक के उच्च पदों पर रहे.
वाजपेयी ने बताया था राजनीति का चतुर खिलाड़ी
बिंदेश्वरी दुबे ने बेरमो कोयलांचल को अपना मुख्य कर्म क्षेत्र बनाया और स्थानीय जन जीवन में इस कदर रच-बस गये कि लोगों ने उनको बाबा कहना शुरू कर दिया. बेरमो के करगली फुटबॉल मैदान में एक चुनावी सभा में पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी बाजपेयी ने बिंदेश्वरी दुबे को राजनीति का एक चतुर खिलाड़ी
बताया था. उन्होंने कहा था कि दुबे जी काफी चालाक निकले. गंगा में डूबे तो यमुना में निकले. विदित हो कि उस वक्त मुख्यमंत्री से हटने के बाद उन्हें केंद्र की राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय कानून व श्रम मंत्री बनाया गया था.
पहली बार जरीडीह से बने थे विधायकवर्ष 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में स्व दुबे जरीडीह विस क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक
बने थे. इसके बाद बेरमो विस से वर्ष 1962, 1967, 1972 व 1979 में भी विधायकका चुनाव जीते. वर्ष 1985 में उन्होंने अपना अंतिम विस चुनाव बिहार के अपने गृह क्षेत्र शाहपुर से लड़ा था और जीत दर्ज की थी. वर्ष 1980 में गिरिडीह से सांसद और 1988 में राज्यसभा सांसद बने. 1984 में केंद्रीय इंटक के अध्यक्ष बने. 1972-77 तक एकीकृत बिहार सरकार में मंत्री रहे. बिहार इंटक के अध्यक्ष के अलावा राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के अध्यक्ष भी रहे. मार्च 1985 से 1988 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. फरवरी 1988 से नवंबर 1989 तक केंद्र में मंत्री रहे. 20 जनवरी 1993 को उनका निधन हुआ था.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
