बोकारो थर्मल में डीवीसी की ओर से 134 करोड़ रुपये की लागत से बनाये गये स्वामी विवेकानंद सेतु (आरओबी) के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गुणवत्ता की अनदेखी व श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने लगाया है. इस संबंध में उन्होंने डीवीसी के अध्यक्ष एस सुरेश कुमार को छह पन्नों का शिकायती पत्र 14 फरवरी को भेजा और एसआइटी जांच कराने की मांग की है. पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, ऊर्जा सचिव और डीवीसी के सीवीओ को भी भेजी गयी है.
क्लीन चिट देने के लिए फिर से हो रहा उद्घाटन
सांसद ने पत्र में कहा कि इस आरओबी का उद्घाटन 26 जनवरी 2020 को तत्कालीन मुख्य अभियंता कमलेश कुमार द्वारा किया जा चुका है. निर्माण में हुए भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों को छुपाने के लिए डीवीसी के कुछ वरीय अधिकारी संवेदक कंपनी को ’क्लीन चिट’ देने की नीयत से इसका फिर से उद्घाटन 28 फरवरी को कराने की योजना बना चुके हैं. सांसद ने पत्र में कहा कि आरओबी के निर्माण में राइट्स, डेको, बीकेबी और सुप्रीम जैसी कंपनियों ने भूमिका निभायी है. निर्माण में इंडियन रेलवे ब्रिज मैनुअल और सुरक्षा मानकों की खुली अवहेलना की गयी है. पुल निर्माण की डिजाइन को ही गलत ठहराया गया है. निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के इपीएफ और इएसआइ भुगतान में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है.
सात दिनों का अल्टीमेटम
पत्र के माध्यम से आरओबी से संबंधित स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग स्कीम, मैटेरियल टेस्ट रिपोर्ट और सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट सहित 11 से अधिक बिंदुओं पर विस्तृत तकनीकी और वित्तीय दस्तावेजों की मांग की गयी है. सात दिनों के समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
