Bokaro News : लेखापाल ने रिटायर्ड हवलदार के नाम से निकाले थे 4.29 करोड़

Bokaro News : बोकारो जिले में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है.

बोकारो जिले में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा शाखा के एक लेखापाल द्वारा सेवानिवृत्त हवलदार के नाम पर बोकारो ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गयी. पुलिस ने आरोपी लेखापाल कौशल कुमार पांडेय को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि लेखापाल कौशल कुमार पांडेय ने जुलाई 2016 में सेवानिवृत्त हुए हवलदार उपेंद्र सिंह के नाम का दुरुपयोग करते हुए पोर्टल में उनकी जन्मतिथि और बैंक खाते से संबंधित जानकारी में छेड़छाड़ की. इसके बाद तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 25 महीनों में 63 बार में कुल चार करोड़ 29 लाख 71 हजार सात रुपये की फर्जी निकासी कर ली. कौशल निकाली गयी राशि अपनी पत्नी अनु पांडेय के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी. इसके लिए फर्जी पे-आइडी बनाया गया. जीपीएफ खाते में छेड़छाड़ और कटौती में अनियमितता पायी गयी. कई मामलों में एक ही अवधि के लिए अलग-अलग वाउचर नंबर से राशि निकाली गयी. साथ ही आयकर (टीडीएस) समेत अन्य कटौतियां भी नहीं की गयी. जांच के दौरान पहले आरोपी ने अनभिज्ञता जतायी, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

डीएसपी स्तर के अधिकारियों ने की मामले की जांच

एसपी ने बताया कि मामले की जांच के लिए मुख्यालय डीएसपी अनिमेष कुमार गुप्ता व सिटी डीएसपी आलोक रंजन को जिम्मेदारी दी गयी थी. ई-कुबेर और डीडीओ पोर्टल की जांच में फर्जी निकासी का खुलासा हुआ. जिला कोषागार पदाधिकारी के आवेदन पर बीएस सिटी थाना में मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से दो मोबाइल फोन जब्त किये गये हैं. साथ ही, उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. जिस बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की गयी थी, उसे भी फ्रीज कर दिया गया है. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग ट्रेजरी वाउचर के माध्यम से राशि निकाली गयी, जिससे लंबे समय तक किसी को शक नहीं हुआ. हालांकि, इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जतायी जा रही है, जिसकी जांच जारी है.

डीडीओ की भूमिका भी संदिग्ध, वेरीफिकेशन में गड़बड़ी की आशंका

मामले में पुलिस विभाग के डीडीओ की भूमिका को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है. डीडीओ स्तर पर वेरिफिकेशन में गड़बड़ी की बात सामने आ रही है. नियमानुसार बिल जेनरेशन, सत्यापन और भुगतान की तीन स्तरीय प्रक्रिया होती है . कार्यालय बिल बनाता है, डीडीओ उसका सत्यापन करता है और ट्रेजरी मिलान के बाद भुगतान करती है . लेकिन इस मामले में तीनों स्तरों पर गंभीर चूक या मिलीभगत की आशंका जतायी जा रही है. पे-आइडी वेरिफिकेशन और प्रमाणपत्र के आधार पर ही ट्रेजरी से भुगतान किया गया.

जिला कोषागार पदाधिकारी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज

दोनों डीएसपी ने सोमवार को कौशल कुमार पांडेय से पहली बार पूछताछ की. उसने अनभिज्ञता जतायी. कहा कि इस प्रकार को कोई विपत्र हस्ताक्षर करा कर ट्रेजरी नहीं भेजा है. इसके बाद ई-कुबेर डीडीओ लेवल बिल मैनेजमेंट सिस्टम गवर्नमेंट ऑफ झारखंड पोर्टल पर जांच की गयी. वित्तीय वर्ष 2023-24, वित्तीय वर्ष 2024-25 व वित्तीय वर्ष 2025-26 का एसडब्लूएन/पीओएल/291 सर्च किया गया, तो फर्जी तरीके से निकासी का पता चला. जिला कोषागार पदाधिकारी गुलाबचंद उरांव के आवेदन पर बीएस सिटी थाना में मामला दर्ज किया गया. इसमें लेखापाल कौशल कुमार पांडेय व अन्य को आरोपी बनाया गया.

पटना के दानापुर का रहनेवाला है आरोपित लेखापाल

पुष्टि के बाद लेखापाल कौशल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जल भेज दिया गया. कौशल मूल रूप से बिहार के पटना जिले के दानापुर थाना स्थित गोला रोड टी प्वाइंट का रहनेवाला है. वह फिलहाल सेक्टर 12 थाना क्षेत्र के पुलिस केंद्र कैंपस में रहता है. उसके पास से पुलिस ने दो मोबाइल जब्त किये हैं. इधर, एसपी हरविंदर सिंह ने बताया कि फर्जी निकासी मामले में गिरफ्तार लेखापाल कौशल कुमार पांडेय को सस्पेंड कर दिया गया है. जांच के बाद आगे विभागीय कार्रवाई की जायेगी. पत्नी के जिस खाते में पैसा ट्रांसफर हुआ है, उसमें से कुछ राशि खर्च करने की बात सामने आयी है. हालांकि एकमुश्त पैसे भेजने की बात सामने नहीं आयी है. अब तक की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग जैसा मामला नहीं दिखा है.

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