राकेश वर्मा, बेरमो : कोल इंडिया व इसकी आनुषांगिक इकाइयों में इंटक के अलग-अलग संगठन चलने से कांग्रेस व इंटक दोनों का नुकसान हो रहा है. पिछले डेढ़ दशक से राजेंद्र सिंह व ददई दुबे के बीच जारी शीत युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा.
दोनों के नेतृत्व में चलनेवाले आरसीएमएस, इंटक व फेडरेशन का चुनाव भी अलग-अलग हो रहा है. हालांकि दोनों के बीच संगठन में वर्चस्व को लेकर विवादों में कांग्रेस के बड़े नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा है. सभी मध्यस्थताओं के बावजूद विवाद सलटने की बजाय लगातार बढ़ता ही चला गया है.
समझौतों की पहल भी कारगर नहीं : इंटक के दोनों गुटों ने अपने संगठनों को असली साबित करने के लिए दोनों गुटों की ओर से माननीय उच्च न्यायालय व ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार के समक्ष भी अपना पक्ष रखा. फिलहाल दिल्ली उच्चतम न्यायालय में अभी तक मामला विचाराधीन है. कोर्ट के आदेश के बाद से पिछले तीन-चार साल से दोनों गुट के नेता कोल इंडिया की सभी कमेटियों सहित जेबीसीसीआइ से बाहर है.
कंपनी स्तर पर जेसीएसी, वेलफेयर, सेफ्टी के अलावा एरिया व पीसीसी आदि की बैठकों में भी प्रबंधन दोनों गुट का आमंत्रित नहीं कर रहा. कुछ माह पूर्व राजेंद्र सिंह व ददई दुबे के बीच समझौता की पहल भी शुरू हुई. दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर इंटक अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी के साथ बैठक भी की, पर बाद में पुन: विवाद गहरा गया.
कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं दोनों नेता : इंटक के दो बड़े नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह व ददई दुबे आरसीएमएस, फेडरेशन व इंटक के कई महत्वर्पूण पदों पर आसीन हैं. सेंट्रल आरसीएमएस के एक खेमा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह अध्यक्ष, एके झा महामंत्री व संतोष कुमार महतो कोषाध्यक्ष है. दूसरे खेमा के अध्यक्ष चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे, महामंत्री एनजी अरुण व कोषाध्यक्ष आरएन चौबे हैं. राष्ट्रीय इंटक के एक खेमा के अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी व महामंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह हैं.
इंटक के दूसरे खेमा के अध्यक्ष ददई दुबे एवं महामंत्री एनजी अरुण हैं. इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन के एक खेमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिंह व महामंत्री एसक्यू जामा हैं तो दूसरे खेमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ददई दुबे एवं महामंत्री एनजी अरुण हैं.
इसके अलावा सीसीएल स्तरीय संयुक्त सलाहकार संचालन समिति (जेसीएसी) में एक खेमा की ओर से राजेंद्र प्रसाद सिंह, गिरिजाशंकर पांडेय एवं मुरलीधर विश्वकर्मा सदस्य है. ददई खेमा की ओर से छविनाथ सिंह एवं शंभु नारायण झा हैं. इसमें छविनाथ सिंह का निधन हो गया है.
इन दोनों को ददई खेमा के दो पुराने सदस्य बद्री सिंह एवं कन्हैया दुबे के निधन के बाद जेसीसी का मेंबर ददई दुबे ने बनाया था. इसके अलावा आरसीएमएस सीसीएल रिजनल कमेटी में भी एक खेमा के अध्यक्ष गिरिजाशंकर पांडेय व सचिव राजेंद्र सिंह तो दूसरे खेमा के अध्यक्ष इसराफिल अंसारी उर्फ बबुनी है. सचिव पद पर रहे अजय कुमार दुबे का हाल में ही निधन हो गया.
जेबीसीसीआइ से बाहर है इंटक
कोल इंडिया की सर्वोच्च समिति जेबीसीसीआइ में इंटक से चार नेता प्रतिनिधित्व करते थे. इसमें सभी इंटक रेड्डी व राजेंद्र खेमा से जुड़े थे. जेबीसीसीआइ के रेगुलर व अल्टरनेट मेंबर्स में इंटक अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी व महामंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह के अलावा एसक्यू जामा व एसबी पाणिग्रही शामिल थे.
जेबीसीसीआइ में इंटक की ओर से रेगुलर व अल्टरनेट मेंबर्स में कुल छह सदस्यों को प्रतिनिधित्व शुरू से मिलता रहा है, पर राजेंद्र व ददई के बीच जारी विवाद में जेबीसीसीआइ में ददई खेमा के दो सदस्यों को प्रतिनिधित्व देने के लिए आज तक दो सदस्यों का पद रिक्त है. श्री दुबे ने दो सीट देने से नाराज होकर अपने किसी सदस्य को इसमें प्रतिनिधित्व नहीं दिया. बाद में लड़ाई कोर्ट में चले जाने से तीन-चार साल से इंटक जेबीसीसीआई से बाहर है.
