बैंकों को सरकारी योजना में लोन देने से रोक रहा एनपीए

37 प्रतिशत लोन एनपीए 2019-20 में 150 लोगों को पीएमइजीपी के तहत देना था कर्ज बोकारो : स्वरोजगार के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना चलायी जाती है. 2019-20 में बोकारो के बैंकों को 150 लोगों को योजना के तहत कर्ज देने का लक्ष्य था, इस लक्ष्य के विरुद्ध सिर्फ तीन […]

37 प्रतिशत लोन एनपीए

2019-20 में 150 लोगों को पीएमइजीपी के तहत देना था कर्ज
बोकारो : स्वरोजगार के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना चलायी जाती है. 2019-20 में बोकारो के बैंकों को 150 लोगों को योजना के तहत कर्ज देने का लक्ष्य था, इस लक्ष्य के विरुद्ध सिर्फ तीन लोगों को ही कर्ज मिला है. मतलब, टारगेट का एक प्रतिशत एचीवमेंट भी नहीं हुआ है. पीएमइजीपी का आंकड़ा सिर्फ इसी साल ही भयावह नहीं है, बल्कि पिछले साल की रिपोर्ट कार्ड ही बैंक को लोन देने से रोक रही है.
पीएमइजीपी योजना के तहत 30 जून 2019 तक नन परफॉर्मिंग एकाउंट का आंकड़ा 37 प्रतिशत था. 1008 अकाउंट में से 375 पीएमइजीपी खाता एनपीए रहा. विभिन्न बैंकों का 975.91 लाख रुपया नन परफॉर्मिंग हो गया. जबकि 10 प्रतिशत से अधिक एनपीए होने की स्थिति में बैंक पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पीसीए लगा दिया जाता है. बोकारो जिला के कई बैंकों ने पीएमईजीपी योजना में रुचि लेना बंद कर दिया है.
फरवरी से बोकारो में नहीं है डीआइसी अधिकारी : पीएमइजीपी योजना के तहत लोन देने में जिला उद्योग केंद्र अहम भूमिका निभाता है. लेकिन, बोकारो की बेचारगी ही कही जाये कि फरवरी 2019 से जिला उद्योग पदाधिकारी का पद ही खाली है. धनबाद के अधिकारी के अतिरक्ति प्रभार में केंद्र चल रहा है. योजना पर इसके असर से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है.

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