नक्सलियों पर काबू को लगाये गये सर्च में कोबरा बटालियन के कमांडो

महुआटांड़ : दनिया घटना के बाद से बोकारो पुलिस किसी भी हाल में मिथिलेश सिंह और उसके दस्ते को सबक सिखाने को आतुर है. शनिवार को लुगु की व्यापक घेराबंदी के दौरान टूटीझरना के पास नक्सलियों से हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस और रेस हो गयी है. जानकारी है कि अब गुरिल्ला व जंगल युद्ध […]

महुआटांड़ : दनिया घटना के बाद से बोकारो पुलिस किसी भी हाल में मिथिलेश सिंह और उसके दस्ते को सबक सिखाने को आतुर है. शनिवार को लुगु की व्यापक घेराबंदी के दौरान टूटीझरना के पास नक्सलियों से हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस और रेस हो गयी है.

जानकारी है कि अब गुरिल्ला व जंगल युद्ध में महारथ रखने वाले कोबरा बटालियन के कमांडोज़ को बुला लिया गया है. हालांकि जगुआर के जवान भी पहले से मोर्चा ले रखे हैं. रविवार की दोपहर तक कोबरा बटालियन के कमांडोज जंगल मे प्रवेश नहीं किये थे. जैसे ही इन्हें सिग्नल मिलेगा ये अपने अंदाज में नक्सलियों की खोज में जुट जायेंगे.
विषम स्थिति में कोबरा कमांडोज का सहारा
जानकारी के मुताबिक, कोबरा बटालियन के कमांडोज को नक्सलियों के खिलाफ मैदान में तभी उतारा जाता है जब स्थिति खतरनाक हो, आतंक ज्यादा हो रहा हो. कोबरा सीआरपीएफ का ही एक दक्ष विंग है, जो गुरिल्ला व जंगल युद्ध मे महारथ हासिल रखता है. जंगल मे इनके हर एक कदम में रणनीति होती है. इनके बटालियन के कमांडोज में सभी की उम्र 30 से नीचे और बेहद फुर्तीले तथा खतरनाक अंदाज होता है.
इनका चयन सीआरपीएफ के लिये चुने जाने वाले अभ्यर्थियों से ही होता है, जिन्हें चार या छह माह तक जंगल मे बेहद कठिन और खतरनाक ट्रेनिंग से गुजरना होता है. ये इतने अाक्रामक होते हैं कि भूख लगने पर जंगल में सांपों तक का आहार कर लेते हैं. विदित हो कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से निबटने में कोबरा कमांडोज का बेहद अहम रोल रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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