बोकारो : बोकारो जिला में दुंदीबाद बाजार फल बाजार का थोक मंडी है. थोक विक्रेताओं की माने तो जिला में लीची की आपूर्ति बंगाल से होती है. बिहार के मुजफ्फरपुर से ट्रांसपोर्टिंग में ज्यादा पैसे लगने के कारण बंगाल से ही माल आता है.
बिहार (मुजफ्फरपुर) को लीची का गढ़ माना जाता है और चमकी बीमारी भी बिहार (मुजफ्फरपुर) में ही फैली है. रोग के कारक में लीची का नाम घसीटे जाने से लोग फल से परहेज कर रहे हैं. इसका नुकसान व्यापारियों को हो रहा है. रोग व लीची को जोड़ने के पीछे साजिश की बात से भी दुकानदार इन्कार नहीं करते.
थोक तो ठीक, लेकिन खुदरा में व्यापक असर : बोकारो जिला में ज्येष्ठ से अषाढ़ माह तक हर दिन दो टन लीची आती है. एक माह में 60 टन लीची की खपत जिला में है.
थोक मंडी में आपूर्ति तो लगभग इतनी ही रही. लेकिन, खुदरा बाजार में खपत 50 प्रतिशत से अधिक की कमी हुई. दुकानदारों की माने तो थोक विक्रेता से खरीदारी खुदरा विक्रेता करते हैं. इस कारण थोक विक्रेता पर असर नहीं हुआ. जबकि खुदरा विक्रेता का संबंध आम आदमी से रहता है. खुदरा दुकानदारों की माने तो लोग लीची का नाम सुनकर ही बीमारी का नाम लेने लग रहे हैं.
एक सप्ताह पहले ही थोक बाजार से गायब हुई लीची : पिछले सप्ताह तक थोक मंडी में लीची की आपूर्ति हुई है. लेकिन, खुदरा बाजार में मांग की कमी को देखते हुए दुकानदारों ने लीची की खेप मंगाना बंद कर दिया. हालांकि इसके पीछे बीमारी के अलावा मौसमी कारण भी बताया गया. खुदरा विक्रेताओं की माने तो 16 जून के बाद बीमारी नाम का जिक्र ज्यादा हुआ. लगभग हर दुकान में चार से पांच कार्टून लीची बर्बाद हो गयी. जबकि इस साल खुदरा का रेट 40 से 50 रुपया है, वहीं पिछले साल रेट 60-80 रुपया तक रहा था. सस्ता होने के बाद भी अफवाह ने बाजार की रौनक उड़ा दी है.
