साक्ष्य छुपाने में पति, देवर व भाभी को तीन वर्ष का सश्रम कारावास
चंदनकियारी के हराइकुरवा गांव में हुई थी आरटीआइ कार्यकर्ता की हत्या
बोकारो : अपर जिला व सत्र न्यायाधीश प्रथम रंजीत कुमार की अदालत ने आरटीआइ कार्यकर्ता की हत्या के मामले में मंगलवार को बालिका देवी (34 वर्ष) व बालिका के देवर लखी रवानी (31 वर्ष) को आजीवन सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी है. हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने के मामले में बालिका देवी व लखी रवानी के साथ बालिका के पति बुल्लू रवानी (44 वर्ष) को भी तीन वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी गयी है.
सजा पाये सभी मुजरिम चंदनकियारी थाना क्षेत्र के हराइकुरवा के रहने वाले हैं. न्यायालय में इस मामले की सुनवाई सेशन ट्रायल संख्या 03/18 चंदनकियारी थाना कांड संख्या 92/17 के तहत चल रही थी. सरकार के तरफ से अपर लोक अभियोजक संजय कुमार झा ने पक्ष रखा. घटना की प्राथमिकी हराइकुरवा गांव निवासी मृतक आरटीआइ कार्यकर्ता सुधीर रवानी (31 वर्ष) के पिता मदन रवानी के बयान पर दर्ज हुई थी. यह घटना 09 अगस्त 2017 की है.
अवैध संबंध की शंका में हुई थी आरटीआइ कार्यकर्ता की हत्या : सुधीर रवानी का शव घटना के दूसरे दिन इजरी नदी स्थित सहारातड़ घाट के निकट पानी से बरामद किया गया था. सुधीर की हत्या बालिका देवी के साथ अवैध संबंध के शंका को लेकर की गयी थी. मुजरिमों ने योजना बनाकर सुधीर को अपने घर में बुलाया. रस्सी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद साक्ष्य छुपाने के लिए सुधीर के शव को ले जाकर इजरी नदी के पानी में फेंक दिया गया. घटना के दूसरे दिन पुलिस ने सुधीर का शव बरामद किया था.
