बोकारो : इलेक्ट्रोस्टील के अधिग्रहण के लिए नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने वेदांता को 5320 करोड़ रुपये के एडवांस पेमेंट करने की मंजूरी दे दी है. चेयरमैन जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली एनसीएलएटी के दो सदस्यों वाली बेंच ने रीनेसंस स्टील की याचिका पर सुनवाई के बाद बुधवार को यह फैसला सुनाया. बेंच ने कहा कि अगर रीनेसंस स्टील यह केस जीत जाती है तो कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स को वेदांता को उसके पैसे वापस लौटाने होंगे. ट्रिब्यूनल ने फिलहाल रीनेसंस स्टील की याचिका पर अपना फैसला रिजर्व रखा है.
रीनेसंस स्टील ने दी थी चुनौती : 17 मई को एनसीएलएटी ने इलेक्ट्रोस्टील कंपनी के लिए वेदांता की बोली को चुनौती देने वाली रीनेसंस स्टील की याचिका को स्वीकार की थी. रीनेसंस स्टील के रिजॉल्यूशन प्लान को इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने खारिज कर दिया था. बता दें कि इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स पर 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. इसमें से करीब 5000 करोड़ रुपया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का है. एनसीएलएटी ने एक मई को इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स की वेदांता स्टील को बिक्री के मामले में यथास्थिति बनाये रखने को भी कहा था.
वेदांता की योग्यता पर उठाये थे सवाल : रीनेसंस स्टील ने इलेक्ट्रोस्टील के अधिग्रहण के लिए वेदांता की योग्यता पर सवाल उठाये थे. रीनेसंस स्टील ने कहा था कि उसकी बोली वेदांता की बोली के मुकाबले ज्यादा मजबूत है. इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के सेक्शन 29ए के अनुसार वेदांता अधिग्रहण के लिए योग्य नहीं है. यूके बेस्ड पैरेंट वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी की एक यूनिट को क्रिमिनल मिसकंडक्ट में दोषी पाया गया है. ऐसे में वेदांता अधिग्रहण के लिए योग्य नहीं है.
