कसमार में आठ करोड़ रुपये से बना आइटीआइ भवन पड़ा है बेकार, हो रहा जर्जर

कसमार: कसमार प्रखंड के मंजूरा में करोड़ों रुपये की लागत से बना आइटीआइ भवन बेकार पड़ा है़ दो साल पहले ही इसे तैयार कर संवेदक द्वारा हैंडओवर किया जा चुका है़ लेकिन, उपयोग के अभाव में सरकार का करोड़ों का खर्च बेकार साबित हो रहा है़ उपयोग व उचित देखभाल के अभाव में यह जर्जर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 9, 2017 12:26 PM
कसमार: कसमार प्रखंड के मंजूरा में करोड़ों रुपये की लागत से बना आइटीआइ भवन बेकार पड़ा है़ दो साल पहले ही इसे तैयार कर संवेदक द्वारा हैंडओवर किया जा चुका है़ लेकिन, उपयोग के अभाव में सरकार का करोड़ों का खर्च बेकार साबित हो रहा है़ उपयोग व उचित देखभाल के अभाव में यह जर्जर भी होने लगा है. आइटीआइ भवन में दो बार चोरी की घटना हो चुकी है.

चोर सिलिंग फैन के अलावा बिजली वायरिंग का सारा सामान तक उखाड़ कर ले जा चुके हैं. फरवरी 2016 में इस भवन में बीएसएल द्वारा आइटीआइ का संचालित करने की बात सामने आयी थी़ बताया गया था कि इसको लेकर बीएसएल के तत्कालीन सीइओ अनुतोष मैत्रा और राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ था़ बीएसएल की टीम ने आइटीआई भवन और निर्माण स्थल का जायजा लेने के बाद इसके निर्माण की सराहना भी की थी़ घोषणा के करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी है़.

भवन का निर्माण पर आठ करोड़ रुपये खर्च हुए. करीब चार एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस परिसर में वर्तमान में आइटीआइ का प्रशासनिक भवन, 12 ट्रेड के लिए कार्यशाला, 100 बेड का हॉस्टल, कैंटीन, चतुर्थ व तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए 8-8 कमरे, प्रिंसिपल का निवास समेत आवश्यक भवन बना हुआ है़ चार डीप बोरिंग भी है़ तत्कालीन श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण व भवन निर्माण मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के हाथों तीन जनवरी 2013 को इसकी आधारशिला रखी गयी थी़ इसके बनने में करीब दो साल का समय लगा़ एपेक्स इंडिकॉन प्राइवेट लिमिटेड के स्थानीय संवेदक गुणानंद महतो ने इसका निर्माण कार्य किया़ लेकिन, आइटीआइ की पढ़ाई कब और कैसे होगी तथा इसका संचालन किस प्रकार होगा, इसको लेकर अभी तक संशय है.
200 छात्रों के प्रशिक्षण की सुविधा है यहां, करीब चार एकड़ में फैला है परिसर
इस औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में हर साल 200 छात्रों के प्रशिक्षण प्राप्त करने की सुविधा मौजूद है़ निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगर प्रशिक्षण शुरू हुआ होता तो अब-तक सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिल गया होता़ युवाओं का मानना है कि एमओयू के अनुरूप बीएसएल द्वारा संचालित होने से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सेल में रोजगार मिलने की संभावन भी रहेगी़ इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा शिक्षित बेरोजगार युवाओं का पलायन रूक सकेगा़ लेकिन, अब-तक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं होने से युवक निराश हैं.
संपर्क पथ का हो चुका है निर्माण
आइटीआइ का जब निर्माण प्रारंभ हो रहा था, तब संपर्क पथ नहीं बना था़ अब लाहरटांड़ से आइटीआइ तक करीब एक किमी संपर्क पथ के तौर पर पीसीसी पथ का निर्माण हो चुका है़ विद्युत आपूर्ति बहाल होना अभी बाकी है़ बताया गया कि बिजली का कनेक्शन अब-तक नहीं जुड़ पाया है़ फिलवक्त यहां चतुर्थ श्रेणी के दो कर्मचारी धनेश्वर सिंह एवं शहीद अंसारी कार्यरत हैं.