राजनीति में आने के लिए किया सरेंडर : कान्हू

जमशेदपुर: बंगाल, झारखंड़ व ओड़िशा बॉर्डर रिजनल कमेटी के सचिव कान्हू राम मुंडा उर्फ मंगल ने कहा कि राजनीति में आने के लिए सरेंडर किया. वे किस पार्टी का दामन थामेंगे, इसका निर्णय गांववालों के साथ बैठक कर तय करेंगे. गांववालों की सहमति मिलने के बाद ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. गोलमुरी पुलिस लाइन में कान्हू […]

जमशेदपुर: बंगाल, झारखंड़ व ओड़िशा बॉर्डर रिजनल कमेटी के सचिव कान्हू राम मुंडा उर्फ मंगल ने कहा कि राजनीति में आने के लिए सरेंडर किया. वे किस पार्टी का दामन थामेंगे, इसका निर्णय गांववालों के साथ बैठक कर तय करेंगे. गांववालों की सहमति मिलने के बाद ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. गोलमुरी पुलिस लाइन में कान्हू मुंडा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुपाई टुडू के मुठभेड़ में मारे जाने और उसकी पत्नी सोनाली की गिरफ्तारी, फोगड़ा मुडा की पत्नी की गिरफ्तारी के बाद नक्सलियों की कमर टूट गयी. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस ने अपने आचरण में काफी बदलाव लाया है.
जो नक्सली बच गये हैं, वह भी सरेंडर करें, सरकार उनका ख्याल रखेगी
कान्हू मुंडा ने सचिन और उनके दस्ते से अनुरोध किया है कि वह नक्सल गतिविधियों को छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें. सरकार सरेंडर करनेवाले नक्सलियों पर ध्यान दे रही है.
गुड़ाबांदा में अब कोई दस्ता नहीं है
कान्हू मुंडा ने कहा कि उनके दस्ता में सात सदस्य बच गये थे. सभी ने सरेंडर कर दिया. अब उनके दस्ता में कोई सदस्य नहीं बचा है. चुन्नू और शंकर पुलिस से भागे-भागे फिर रहे थे. दोनों को उन्होंने सरेंडर से चार दिनों पहले बुलाया था और सरकार की नीति के बारे में बताया था.
चाकुलिया में मुख्यमंत्री के भाषण से हुए थे प्रभावित
कान्हू ने कहा कि चाकुलिया में पिछले वर्ष मुख्यमंत्री रघुवर दास पेड़ लगाने के कार्यक्रम में आये थे. वहां पर मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में नक्सलियों को मुख्यधारा से जुड़ने का निमंत्रण दिया था. उनके भाषण से काफी प्रभावित हुआ था.
छत्तीसगढ़ के श्रीधर दादा ने ज्वाइन कराया था नक्सली दस्ता में
कान्हू मुंडा ने बताया कि वर्ष 2000 में जियान गांव में एक हत्या हुई थी. हत्या के बाद पुलिस की कार्रवाई से तंग आकर गांव के युवाओं ने जंगल में रहना शुरू कर दिया था. उस वक्त गांव में न सड़क थी और न पानी, बिजली की व्यवस्था . इस दौरान छत्तीसगढ़ से श्रीधर दादा जियान गांव पहुंचे और उन्होंने पुलिस व सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए मोटिवेट किया और वह नक्सली दस्ता में शामिल हो गये. उसने कहा कि विकास कार्य से नाराज होकर ही उसने बीडीओ प्रशांत लायक का अपहरण किया था.
लेवी से गांव में होता था विकास
कान्हू ने बताया कि नक्सली अपनी जरूरत पूरी करने के लिए व्यापारियों से लेवी नहीं वसूलते थे, बल्कि वसूली गयी रकम से वह गांव में कुआं बनवाने, तालाब खुदवाने तथा डीजल पंप लगवाने का काम करते थे. साथ ही व्यापारियों से 10-20 क्विंटल चावल गरीबों के बीच बंटवाते थे. उसने पन्ना व्यापारी से कभी लेवी नहीं लेने की बात कही है.
राहुल से मुलाकात हुई थी
कान्हू मुंडा ने कहा है कि राहुल से मुलाकात तीन-चार बार हुई. फरारी में रहने के दौरान वह राहुल से मिला, लेकिन सरेंडर के बारे में कभी कोई बातचीत नहीं हुई.

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