फर्जी आधार कार्ड बनवाकर 400 से अधिक लोगों ने ली नौकरी, दिल्ली हाईकोर्ट ने UIDAI को दिया ये ऑर्डर

विजेंदर गुप्ता (Vijender Gupta) ने दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा में शिकायत की कि डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) की बसों में जिस तरीके से मार्शल की भर्ती हुई है, वह अवैध है.

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 22, 2022 11:02 PM

नयी दिल्ली: फर्जी आधार कार्ड (Fake Aadhaar Card) बनवाकर 400 लोगों ने दिल्ली में नौकरी ले ली. इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने आधार कार्ड (Aadhaar Card) जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से उन सभी 400 से अधिक लोगों के बारे में सूचना मुहैया कराने का निर्देश दिया है.

सिविल डिफेंस में पंजीकरण के लिए हुआ फर्जी आधार का इस्तेमाल

बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में ‘सिविल डिफेंस’ में पंजीकरण (Civil Defence Registration) कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड जारी किये गये थे. जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने दिल्ली सरकार की वह याचिका स्वीकार कर ली है, जिसमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को यह निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वह (यूआईडीएआई) एक मामले की पड़ताल के लिए जांच एजेंसी द्वारा आधार कार्ड (Aadhaar Card) धारकों के बारे में मांगी गयी सूचना मुहैया कराये.

यूआईडीएआई को दिया जानकारी देने का आदेश

भ्रष्टाचार रोधी शाखा ने कथित आपराधिक षड्यंत्र को लेकर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया है. अदालत ने कहा, ‘अदालत याचिका को स्वीकार करती है. प्रतिवादी (यूआईडीएआई) को निर्देश दिया जाता है कि याचिका में संलग्न जिन लोगों के भी नाम हैं, उनके बारे में आधार कानून के प्रावधानों के तहत सभी संबंधित सूचना मुहैया कराएं.’

राजस्थान के रहने वाले डीएम ने 2 लाख रुपये लेकर आधार को किया सत्यापित

याचिका के अनुसार, शिकायतकर्ता विजेंदर गुप्ता (Vijender Gupta) ने दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा में शिकायत की कि डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम की) बसों में जिस तरीके से मार्शल की भर्ती हुई है, वह अवैध है. इसमें आरोप लगाया गया कि भर्ती प्रक्रिया से छेड़छाड़ की गयी और जिलाधिकारी ने अपने गृह राज्य राजस्थान (Rajasthan) के 400 से अधिक लोगों को फर्जी प्रमाण पत्र जारी किये और आधार कार्ड बनाये जाने के लिए उन्हें दिल्ली के निवासी के तौर पर सत्यापित किया. साथ ही, प्रति व्यक्ति दो लाख रुपये जबरन वसूले गये. शिकायत के आधार पर जनवरी 2020 में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

Posted By: Mithilesh Jha

Next Article

Exit mobile version