दिल्ली के स्कूलों में अब 'देशभक्ति पाठ्यक्रम', शहीदों को जानेंगे बच्चे, सीएम अरविंद केजरीवाल ने लाया ये बदलाव

बच्चों में राष्ट्रभक्ति जागृत करने के लिए आज से दिल्ली सरकार पाठ्यक्रम में देशभक्ती अध्याय शुरू कर रही है. स्वतंत्रता सेनानी और महान क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंति के मौके पर यानी 28 सितंबर से दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार यह पाठ्यक्रम लागू कर रही है.

दिल्ली बोर्ड के सिलेबस में आज से एक नया अध्याय शुरू हो रहा है. बच्चों में राष्ट्रभक्ति जागृत करने के लिए आज से दिल्ली सरकार पाठ्यक्रम में देशभक्ती अध्याय शुरू कर रही है. स्वतंत्रता सेनानी और महान क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंति के मौके पर यानी 28 सितंबर से दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार यह पाठ्यक्रम लागू कर रही है. दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में नर्सरी से कक्षा 12 तक की हर कक्षा में यह पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है.

वहीं, स्कूलों में लागू होने वाले देशभक्ति पाठ्यक्रम की पढ़ाई से पहले विद्यार्थियों को 5 मिनट का ध्यान भी लगवाया जाएगा. उसके बाद अध्याय शुरू होगा. गौरतलब है कि, दिल्ली में बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाने, संविधान और उसके प्रति आदर विकसित करने के मकसद से यह पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है.

नर्सरी से से 12वीं तक लागू होगा पाठ्यक्रम: दिल्ली में केजरीवाल सरकार देशभक्ति पाठ्यक्रम नर्सरी से लेकर बारहवीं तक की कक्षाओं में लागू कर रही है. दिल्ली में जब स्कूलों में कक्षाएं चलने लगेंगी तब से यह पाठ्यक्रम शुरू हो जाएगा. यानी अद दिल्ली के स्कूलों में नर्सरी से अब से नर्सरी से 8वीं कक्षा तक प्रतिदिन देशभक्ति का एक क्लास होगा. वहीं, 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं में सप्ताह में दो पीरियड होगा.

क्या होगा पाठयक्रम में शामिल: देशभक्ति पाठ्यक्रम के दौराम शिक्षक और छात्र देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और उनके अभुतपूर्व बलिदान को याद करेंगे. देश के लिए उनके कृतज्ञता, स्वतंत्रता सेनानियों और किन्हीं पांच व्यक्तियों को वे देशभक्त मानते हैं, उनके सम्मान की प्रतिज्ञा लेंगे. वहीं, पाठ्यक्रम को लेकर दिल्ली के सीए अरविंद केजरीवाल का कहना है कि, छात्रों को स्वतंत्रता और राष्ट्र के गौरव के बारे में कहानियां सुनाई जाएंगी. बच्चों को देश के प्रति उनकी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का एहसास कराया जाएगा.

गौरतलब है कि, सरकार द्वारा नियुक्त पैनल ने देशभक्ति पाठ्यक्रम की रूपरेखा 6 अगस्त को ही राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने अनुमोदित कर दिया था. इस पाठ्यक्रम को बनाने में 41 सलाहकार शिक्षक, 9 एनजीओ भागीदारों और विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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Posted by: Pritish Sahay

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