छपरा में बाढ़ का कहर, सड़क पर जिंदगी

Watch VIDEO: ‘रात में क्या होगा पता नहीं’, छपरा में बाढ़ का कहर; घर डूबे तो छत बनी सहारा, सड़क पर जिंदगी

छपरा में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लगातार बढ़ते पानी से घर और सड़कें जलमग्न हैं. कई परिवार छतों पर रहने और मवेशियों को ऊंची जगहों पर रखने को मजबूर हैं, जबकि राहत और प्रशासनिक मदद का इंतजार जारी है.

Bihar Chhapra Flood Ground Report : छपरा में बाढ़ ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लगातार बढ़ते जलस्तर से कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. घरों में पानी घुसने के बाद लोग सामान समेटकर सुरक्षित जगहों की तलाश में जुटे हैं. कई परिवार सड़क किनारे तंबू और प्लास्टिक के सहारे रहने को मजबूर हैं, तो कई लोग घर की छत को ही अपना आशियाना बना चुके हैं.

हर साल आती है बाढ़, लेकिन राहत का इंतजार

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में हर साल बाढ़ की स्थिति बनती है, लेकिन उन्हें समय पर सरकारी मदद नहीं मिलती. स्थानीय निवासी चंदन कुमार सिंह ने बताया कि दो-तीन दिनों से पानी तेजी से बढ़ रहा है. घरों में रखा सामान सुरक्षित जगह पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है. लोगों को यह चिंता सता रही है कि रात में जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति क्या होगी.

घर डूबे तो छत बनी सहारा

बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ कई घरों के आसपास जलजमाव हो गया है. कुछ घरों में पानी प्रवेश कर चुका है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब घर में पानी भर जाता है तो परिवार छत पर जाकर रहने को मजबूर हो जाते हैं. कई लोगों ने बताया कि उनके पास दूसरी जगह जाने का कोई इंतजाम नहीं है.

सड़क तक पहुंचा पानी, आवागमन प्रभावित

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो दिनों से पानी तेजी से बढ़ रहा है. सड़क पर पानी पहुंचने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है. कई जगहों पर सड़क के दोनों किनारे पानी से घिरे हैं. लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ता रहा तो आने वाले समय में परेशानी और गंभीर हो सकती है.

मवेशियों को बचाने की भी बड़ी चुनौती

बाढ़ का संकट सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है. लोगों के सामने अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने की भी चुनौती है. कई परिवार अपने पशुओं को सड़क किनारे ऊंची जगहों पर रखने को मजबूर हैं. चारा और पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है.

रोजगार और बच्चों की पढ़ाई पर भी असर

बाढ़ के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी के साथ रोजगार भी प्रभावित हुआ है. स्थानीय निवासी जितेंद्र शाह ने बताया कि वह लिट्टी की दुकान चलाते हैं, लेकिन जलजमाव के कारण कामकाज पर असर पड़ रहा है. वहीं, बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. घर और आसपास पानी जमा होने से बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी नाराजगी

बाढ़ प्रभावित लोगों में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर नाराजगी है. लोगों का कहना है कि अब तक कोई जनप्रतिनिधि उनकी स्थिति देखने नहीं पहुंचा है. स्थानीय लोगों ने सुरक्षित स्थान, भोजन, पीने का पानी और मवेशियों के लिए चारे समेत जरूरी राहत उपलब्ध कराने की मांग की है.

नदी से दूर इलाकों तक पहुंचा पानी

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस क्षेत्र में अभी पानी पहुंचा है, वहां पहले नदी काफी दूर थी. अब जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों और सड़कों पर पानी फैल गया है. कई जगहों पर घरों के अंदर रखा सामान और खाट-चौकी तक पानी में डूब चुकी है.

सड़क पर ठहरी जिंदगी, मदद का इंतजार

फिलहाल बाढ़ प्रभावित परिवार पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं. किसी के घर में पानी है, किसी का रोजगार बंद है और किसी के सामने बच्चों और मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती है. इन परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद अब प्रशासनिक राहत पर टिकी है. सवाल यही है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत कब पहुंचेगी और उन्हें सुरक्षित ठिकाना, भोजन, पीने का पानी और जरूरी सहायता कब मिलेगी.

छपरा से आदर्श गुप्ता की रिपोर्ट

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By विवेक सिंह

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