लापरवाही Â विभागीय अधिकारी इसको अमली जामा पहनाने के बजाय इसकी दशा बिगाड़ने में लगे हैं
वैशाली : प्रखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल राजा विशाल के गढ़ पर स्थित पार्क की सड़क इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. राजा विशाल गढ़ के खुदाई स्थल के पास पुरातत्व विभाग के द्वारा एक पार्क का निर्माण कराया गया है. खुदाई स्थल एवं पार्क को देखने प्रतिदिन काफी संख्या में पर्यटक आते हैं और इस खंडहर के मनोहर दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर यहां की यादों को सहेज कर अपने साथ ले जाते हैं. साथ ही इस पार्क में घंटो बैठ कर यहां के खंडहरों को देख कर इतिहास को समझते हैं.
पार्क को देखने के लिये चारों ओर सड़क का निर्माण कराया गया है, लेकिन वर्षों से सड़क निर्माण के नाम पर पुरातत्व विभाग के द्वारा सड़क को खोदकर छोड़ दिया गया है, जिस कारण इन खंडहरों और पार्कों को देखने आनेवाले पर्यटकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सड़क पुरा खुदा हुवा होने से पर्यटको का पैर टूटने तथा पैर में मोच आने का खतरा बराबर बना रहता है. आश्चर्य की बात है कि जिस जगह पर पर्यटक प्रतिदिन काफी संख्या में आते हैं, उस जगह की सड़क को वर्षों से खोदकर छोड़ देना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है. सरकार जहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये नई-नई घोषणायें कर रही है, वहीं विभागीय अधिकारी इसको अमलीजामा पहनाने के बजाय इनकी दुर्दशा बिगाड़ने में लगे हैं. मालूम हो की राजा विशाल के गढ़ के नाम से प्रसिद्ध प्राचीन ईंटो से निर्मित यह एक विशाल टीला है, जिसकी ऊंचाई सामान्य सतह से 10 फिट है. इसके चारों ओर 20 फिट गहरी और लगभग 300 फीट चौड़ी खाई बनी है, जो पुराने समय में सामान्यतः सभी किलो के चारों ओर सुरक्षा की दृष्टि से बनाई जाती थी. इस किले का क्षेत्रफल लगभग 60 एकड़ है. यही वह स्थान है जहां गणतंत्रीय वैशाली का मुख्य संस्थागार हुआ करता था, जहां 7777 जनप्रतिनिधि एक साथ बैठकर राज्य की समस्याओं का समाधान निकाला करते थे. इस ऐतिहासिक स्थल से खुदाई से अनेक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए है, जो पटना तथा वैशाली के म्यूजियम में रखे गये हैं.
