हाजीपुर : सावन की दूसरी सोमवारी पर शिव भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया. इस दौरान हर-हर महादेव बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर गूंजता रहा. नगर के शिवालयों, मठ-मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मंगल कामना की. अावासीय परिसरों में भी चहल-पहल बनी रही. स्टेशन चौक स्थित […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
हाजीपुर : सावन की दूसरी सोमवारी पर शिव भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया. इस दौरान हर-हर महादेव बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर गूंजता रहा. नगर के शिवालयों, मठ-मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मंगल कामना की. अावासीय परिसरों में भी चहल-पहल बनी रही.
स्टेशन चौक स्थित शिव मंदिर में इस अवसर पर प्रधान पुजारी अशोक बाबा ने वैदिक मंत्रों के बीच रुद्राभिषेक कराया. इसके अलावा नगर महादेव बाबा पतालेश्वर नाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गयी. हरिहरक्षेत्र स्थित हरिहरनाथ मंदिर में आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा. नगर के अनवरपुर, गांधी चौक, राजपूतनगर कॉलोनी, कोनहारा घाट आदि पर स्थित शिव मंदिर के अलावा हर छोटे-बड़े मंदिरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे. पूरा शहर शिवमय बना रहा. घंटियों की नाद व मंत्रों की गूंज से नगर भक्तिमय बना रहा.
शृंगार आरती में हुए शामिल : सोमवारी व्रत व जलाभिषेक को लेकर उत्साह उमंग बनी रही. शिवालयों में संध्या के समय भगवान शिव का आकर्षक शृंगार किया गया और आरती की गयी. इसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. पतालेश्वर नाथ मंदिर सहित सभी शिवालयों में विशेष आरती की गयी. झाल, कृपाल, घंटा एवं अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों द्वारा की जा रही आरती से पूरा वातावरण अाध्यात्मिक बना रहा. आवासीय परिसरों में महिलाओं ने सोमवारी का व्रत रखा. दिन भर उपवास रहने के बाद रात्रि में फलाहार किया. व्रत अधिकतर महिलाएं कर रही हैं, हालांकि सोमवारी का व्रत पुरुष भी करते हैं.
नारायणी नदी के घाटों पर बनी रही चहल-पहल : नारायणी नदी के विभिन्न घाटों पर अहले सुबह से ही चहल-पहल बनी रही. हालांकि नदी में पानी बढ़ने से श्रद्धालु सतर्क भी दिखे. एेतिहासिक कोनहारा घाट, सीढ़ी घाट, पुल घाट, चित्रगुप्त घाट आदि पर श्रद्धालुओं ने सावधानी पूर्वक स्नान कर पूजा ध्यान किया और जल लेकर शिवालयों की ओर प्रस्थान किया. नारायणी के पवित्र घाटों पर श्रद्धालु अहले सुबह से पहुंचना शुरू कर दिया था. स्नान व जलाभिषेक करने का सिलसिला शाम ढलने तक जारी रहा.