हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा

हाजीपुर : नाच देखने के लिए घर से बुलाकर ले जाने के बाद हंसुआ से गला रेत कर हत्या कर दिये जाने के मामले में न्यायालय ने एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनायी है. देसरी थाने के पोहियार गांव में 17 सितंबर, 2009 की रात घटित इस घटना की सुनवाई सत्र वाद संख्या-80/10 के […]

हाजीपुर : नाच देखने के लिए घर से बुलाकर ले जाने के बाद हंसुआ से गला रेत कर हत्या कर दिये जाने के मामले में न्यायालय ने एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनायी है. देसरी थाने के पोहियार गांव में 17 सितंबर, 2009 की रात घटित इस घटना की सुनवाई सत्र वाद संख्या-80/10 के अंतर्गत करते हुए जिला एवं सत्र न्यायधीश एके जैन ने दोषी धर्मेंद्र कुमार सिंह को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. सुनवायी के दौरान लोक अभियोजक वीरेंद्र नारायण सिंह ने न्यायालय में कुल 14 साक्षियों के साक्ष्य कराये और पैरवी की, जबकि सफाई पक्ष की ओर से अधिवक्ता राम स्नेही मिश्र ने पैरवी की.

क्या थी घटना : देसरी थाने के पोहियार गांव निवासी शिवनाथ सिंह 17 सितंबर, 2009 की रात अपने घर पर थे कि उसी गांव के टुनटुन सिंह व धर्मेंद्र कुमार सिंह रात 8.30 बजे आये और नाच देखने के लिए बुलाकर अपने साथ ले गये तथा रास्ते में हंसुआ से गला रेतकर उनकी हत्या कर दी. रास्ते से आने-जाने वाले लोगों ने खून से सने टुनटुन सिंह को हंसुआ लेकर भागते देखा और आगे बढ़ने पर देखा कि शिवनाथ सिंह खून से लथपथ पड़े हैं.
तीन के विरुद्ध मामला : इस मामले में वाल्मीकि सिंह के पुत्र और मृतक शिवनाथ सिंह का भतीजा प्रियव्रत के बयान पर देसरी पुलिस ने गांव के टुनटुन सिंह, अमिताभ सिंह और धर्मेंद्र कुमार सिंह के विरुद्ध हत्या के आरोप में कांड संख्या-190/09 दर्ज की थी. अनुसंधान के बाद तीनों के
विरुद्ध आरोप पत्र भी समर्पित किया गया था. अमिताभ सिंह के किशोर होने के कारण वाद किशोर न्यायालय में स्थानांतरित हो गया और शेष दो अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय ने विचारण प्रारंभ किया.
एक अभियुक्त हुआ विक्षिप्त
विचारण के दौरान एक अभियुक्त टुनटुन सिंह विक्षिप्त हो गया. इसके बाद न्यायालय ने उसके अभिलेख को अलग कर केवल धर्मेंद्र कुमार सिंह के विरुद्ध विचारण प्रारंभ की. कुल 14 साक्षियों के साक्ष्य और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 22 जुलाई को न्यायालय ने धर्मेंद्र कुमार सिंह को भादवि की धारा 302 के अपराध का दोषी पाया और शनिवार को सजा की बिंदु पर सुनवाई की. सजा की बिंदु पर दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी.

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