खाकी बाबा के मजार पर लगा मेला

चादरपोशी कर लोगों ने मांगी सलामती की दुआ महनार : महनार बाजार के थाना मोड़ के समीप अवस्थित खाकी बाबा की जयंती पर वार्षिकोत्सव व मेले का भव्य आयोजन किया गया. खाकी बाबा का मजार सांप्रदायिक सौहार्द एवं गंगा जमुनी तहजीब की एक अद्वितीय मिसाल है. यहां पर हिंदू-मुसलिम दूर-दराज से आकर प्रतिवर्ष चादरपोशी एवं […]

चादरपोशी कर लोगों ने मांगी सलामती की दुआ

महनार : महनार बाजार के थाना मोड़ के समीप अवस्थित खाकी बाबा की जयंती पर वार्षिकोत्सव व मेले का भव्य आयोजन किया गया. खाकी बाबा का मजार सांप्रदायिक सौहार्द एवं गंगा जमुनी तहजीब की एक अद्वितीय मिसाल है. यहां पर हिंदू-मुसलिम दूर-दराज से आकर प्रतिवर्ष चादरपोशी एवं सलामती की दुआ मांगते हैं. सालाना उर्स के मौके पर बाबा के मजार पर भव्य मेले का आयोजन किया गया है.
जानकारों का कहना है कि 10वीं शताब्दी के आसपास सूफी रहस्यवाद का जन्म हुआ था. इसी सूफीवाद के प्रचार-प्रसार में बिहारशरीफ हजरत सर्फुद्दीन अहमद, मनेर में हजरत महमूद, नवादा में हजरत ख्वाजा, हाजीपुर में हजरत अब्दुल, काजन सतारी, कांटी में तेगी अली साह तथा मुजफ्फरपुर में सत्तारी संप्रदाय के सूफी संत खाकी बाबा हुए, जिन्होंने महनारवासियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी, जो आज तक जीवित है. खाकी बाबा का असली नाम हजरत नेमत अली था,
इनके पिता अली बख्स सीतामढ़ी के पोखरैरा के निवासी थे. नेमत अली की 1930 में मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर मुराद अली से मुलाकात हुई और उन्होंने मुकदमे में डिग्री की दुआ अदा कराने के लिए खाकी बाबा को महनार लेकर आये थे. खाकी बाबा की दुआ अदा की बदौलत मुराद अली को केस में डिग्री मिल गयी और पूरे क्षेत्र में खबर आग की तरह फैल गयी और उसके बाद दीन दु:खी लोग दूरदराज से खाकी बाबा के पास अपनी दु:खों का निबटारा के लिए आने लगे.
1932 में खाकी बाबा सुपुर्द-ए-खाक हुए और 1934 से उनके मजार पर उर्स का मेला लगना शुरू हुआ और मजार पर आकर लोगों के दिल को शांति एवं सुकून मिलता है. प्रत्येक वर्ष अनुमंडल प्रशासन के द्वारा खाकी बाबा के मजार पर चादरपोशी कर सलामती की दुआ मांगी जाती है. अनुमंडलाधिकारी रवींद्र कुमार, डीसीएलआर ललित कुमार सिंह, प्रशिक्षु एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा, थानाध्यक्ष भागीरथ प्रसाद एवं हरिश्चंद्र जायसवाल, डॉ प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन, मनोज कुमार मेहता, बीडी सहनी, यशवंत सिंह, अश्विनी कुमार आलोक, कृत्यानंद सिंह आदि ने खाकी बाबा के मजार पर चादरपोशी कर सलामती की दुआ मांगी.

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