शहर में सीवरेज निर्माण और ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुए पांच साल हो गये. बुडको की देखरेख में शुरू हुआ हाजीपुर शहरी क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये नदी में बहाये जाने की योजना के तहत सीवरेज निर्माण का काम कब पूरा होगा, यह कोई नहीं जानता. दो साल में यह योजना पूरी हो जानी थी. निर्माण अवधि बढ़ने से न केवल निर्माण लागत बढ़ती जा रही है लेकिन नप इस मामले में मौन है.
उम्मीदों पर फिरा पानी विडंबना. दो साल में बननेवाला सीवरेज प्लांट पांच साल में आधा भी नहीं बन सका
शहर में सीवरेज निर्माण और ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुए पांच साल हो गये. बुडको की देखरेख में शुरू हुआ हाजीपुर शहरी क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये नदी में बहाये जाने की योजना के तहत सीवरेज निर्माण का काम कब पूरा होगा, यह कोई नहीं […]

हाजीपुर : शहर में सीवरेज निर्माण का काम कब पूरा होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है. जलजमाव से मुक्ति और गंदे पानी की निकासी के लिए बनायी गयी इस महत्वाकांक्षी योजना में कार्य एजेंसी की लापरवाही की हद हो गयी है. काम की रफ्तार देख निराश हो गये हैं नगरवासी, क्योंकि इस साल भी जल जमाव की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद पर पानी फिर गया है. योजना की हालत देखने से पता चलता है कि शायद इसमें कई साल और लग जायेंगे.
दिसंबर, 2013 तक कर लेना था काम पूरा : शहर में सीवरेज निर्माण और ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुए पांच साल हो गये. हाजीपुर शहरी क्षेत्र से निकलनेवाले गंदे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये नदी में बहाये जाने की योजना के तहत सीवरेज निर्माण का काम बुडको की देखरेख में शुरू हुआ. दो साल में यह योजना पूरी हो जानी थी. स्थिति यह है कि पांच साल हो गये, लेकिन आधा काम भी नहीं हो पाया है. 12 अप्रैल, 2010 को इस प्रोजेक्ट की अनुमति मिली थी. नेशनल गंगा बेसिन अथॉरिटी ने इसके लिए 113 करोड़ 62 लाख रुपये उपलब्ध कराये थे. 12 दिसंबर, 2011 को नगर में सीवरेज निर्माण का काम शुरू हुआ. दिसंबर, 2013 तक इसे पूरा कर लेना था.
समय बढ़ता गया और काम की रफ्तार थमती गयी : सीवरेज निर्माण की शुरुआत में तो काम की रफ्तार ठीक रही, लेकिन आगे चल कर इसकी गति मंद पड़ने लगी. चाहे जिन कारणों से काम में शिथिलता आयी हो, लेकिन 2014 में निर्माण कार्य की स्थिति बेहद निराशाजनक थी. इसे देखते हुए योजना अवधि का विस्तार कर मार्च, 2015 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया. यह समय सीमा भी बीत गयी, लेकिन 20 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो पाया. तब और नौ महीने का समय लेकर इसे दिसंबर, 2015 तक पूरा करने का लक्ष्य बना. यह समय भी बीत गया, लेकिन 60 प्रतिशत से ज्यादा काम अभी तक बाकी है.
शासन-प्रशासन के निर्देशों के बावजूद कार्य एजेंसी पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा. काम की रफ्तार में कोई तेजी नहीं दिखाई पड़ रही है. योजना पूरी होने में जरूरत से ज्यादा विलंब के कारण इसकी लागत भी बढ़ती चली जा रही है.
चीन की कंपनी करा रही है निर्माण कार्य : सीवरेज निर्माण का काम चीन की कंपनी एमएस ट्राइटेक के जिम्मे है. बिहार अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की देखरेख में इस योजना पर काम चल रहा है. एमएस इंडिया लिमिटेड को सुपरविजन का दायित्व मिला हुआ है. इस योजना के तहत 198 किलोमीटर के सीवर नेटवर्क में 11,382 मैनहोल तथा चार पंपिंग स्टेशनों का निर्माण होना है. इसके अलावा लगभग 30 एकड़ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कंपनी ने शहरी क्षेत्र को पांच जोनों में बांटा है. अभी तक एक जोन का काम भी शायद ही पूरा हो सका है.
काम की रफ्तार देख नगरवासी निराश, नगर पर्षद मौन
देर होने से बढ़ती जा रही है लागत
नेशनल गंगा बेसिन अथॉरिटी ने इसके लिए उपलब्ध कराये थे 113 करोड़ 62 लाख रुपये
नगर पर्षद को नहीं मालूम कि कहां, कैसे हो रहा काम
नगर क्षेत्र में इतने बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, लेकिन इसके कार्यों को लेकर नगर पर्षद भी अनभिज्ञ है. नगर पर्षद के अधिकारी कहते हैं कि इस काम पर पर्षद का कोई नियंत्रण नहीं है. निर्माण एजेंसी द्वारा प्रोजेक्ट के काम के बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी जाती. नगर पर्षद के सभापति हैदर अली और उपसभापति निकेत कुमार सिन्हा डब्लू कंपनी के काम के तरीके पर एतराज जाहिर करते हैं. वे कहते हैं कि एग्रीमेंट के मुताबिक,
नगर पर्षद को सारे कार्यों की जानकारी देनी है. नगर पर्षद से एनओसी मिलने के बाद ही निर्माण एजेंसी को भुगतान होना है. सीवरेज का पाइप लाइन बिछाने के लिए जो सड़कें खोदी जाती हैं, उनकी लगे हाथ मरम्मत करानी है. कार्य एजेंसी द्वारा इन तमाम चीजों की अनदेखी की जा रही है.