हाजीपुर : एक सामान्य आदमी सामान्य स्थिति में होटल में नहीं खाता और वह घर पहुंच कर ही कुछ खाने का प्रयास करता है. राज्य सरकार द्वारा पांच अप्रैल से घोषित पूर्ण शराबबंदी के बाद होटलों की स्थिति देखने पर ऐसा ही लगता है. विभिन्न राजमार्गों पर स्थित लाइन होटलों के अलावा शहर के कई होटलों में शाम ढलते ही लगनेवाली भीड़ देर रात तक बनी रहती थी. आम लोग यह समझते थे कि होटलों में लगी यह भीड़ राज्य में आयी आर्थिक खुशहाली का प्रतीक है और लोग अपना स्वाद बदलने के लिये होटलों में भोजन का आनंद लेते हैं. लोगों में इतनी आर्थिक संपन्नता आ गयी है कि वे प्राय: रोज होटलों में जा रहे हैं.
लेकिन, लोगों का यह विश्वास तब डिग गया, जब राज्य सरकार ने पूर्ण शराबबंदी की घोषणा कर दी. शराबबंदी की घोषणा के बाद से उन होटलों में शांति छायी हुई है और देर रात तक गुलजार रहनेवाले होटलों में अब काफी कम ग्राहक दिख रहे हैं. होटलों की इस दुर्दशा को देख कर यही कहा जा सकता है कि या तो लोग शराब के नशे में ही होटलों में खाते थे और नशा बंद होते ही होटलों में खाना बंद कर दिया या होटलों में खाने के बदले पीने की व्यवस्था थी, जो सरकारी रोक के बाद समाप्त हो गयी और उनके यहां ग्राहकों का फटकना बंद हो गया.
बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि लोग शराब की नशे में ही खाने जाते थे, तो होटल उद्योग के लिए यह बुरी बात है और यदि वहां पीने की व्यवस्था थी, तो यह और भी बुरी बात है. क्योंकि इसके लिए उनके पास कोई वैध अनुज्ञप्ति नहीं थी. कुछ होटल संचालक सरकार को कोस रहे हैं, लेकिन खुल कर कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं.
